आलेख

बिम्ब प्राण प्रतिष्ठा एवं भव्य स्मारक प्रतिष्ठा : चतुर्थ पट्टाचार्य आचार्य अजितसागर जी महाराज


श्री दिगम्बर जैन अजितकीर्ति गिरि साबला में 6 दिसम्बर से 8 दिसम्बर 2023 तक आचार्य अजितसागरजी महाराज बिम्ब प्राण प्रतिष्ठा एवं भव्य स्मारक प्रतिष्ठा मंगल महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है ।महोत्सव पंचम पट्टाधीश वात्सल्य वारिधि आचार्य शिरोमणी 108 श्री वर्धमानसागर जी महाराज के पावन सान्निध्य और आशीर्वाद से हो रहा है कौन हैं आचार्य श्री अजित सागर जी महाराज आइए जानते हैं ।पढ़िए डॉ. अल्पना मारौरा “शुभि” इन्दौर का ये आलेख


प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवती आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परंपरा के चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री अजित सागर जी का जन्म वि. सं. 1982 में मध्यप्रदेश के भोपाल नगर के पास भौंरा ग्राम में हुआ था। जबरचंद्र जी पिता एवं माता का नाम रूपाबाई था। उन्होंने आपका नाम राजमल रखा आपने कक्षा चौथी तक ही पढाई की, वि.सं. 200 में वीरसागरजी के प्रथम दर्शन करते ही आप 17 वर्ष की आयु में ही संघ में शामिल हो गए।

वि.सं. 2002 आपने झालरापाटन में आचार्य वीरसागरजी से सातवीं प्रतिमा के व्रत लिए। जैन धर्म की शिक्षा आर्यिका ज्ञानमती जी से ली, माता जी की प्रेरणा से आचार्य शिवसागरजी महाराज से वि. सं. 2018 को आपने मुनिदीक्षा ग्रहण की और आपका नाम रखा अजितसागर। आपने संस्कृत के पाँच हजार श्लोकों का संग्रह किया जो “सर्वोपयोगी श्लोक संग्रह” के नाम से प्रकाशित हैं । आचार्य धर्मसागर जी के समाधि के बाद 7 जून 1987 को उदयपुर में विशाल जनसमूह के सामने संघ के सानिध्य में आपको आचार्य शांतिसागर जी की परंपरा का चतुर्थ पट्टाधीश घोषित किया गया। आचार्य धर्मसागरजी के पश्चात् आप इस पद पर प्रतिष्ठित हुए और इस परंपरा के चतुर्थ पट्टाधीश कहलाये।

30 वर्ष के संयमी जीवन में आपने 10 मुनि, 7 आर्यिका, एक ऐलक, 3 क्षुल्लक तथा एक क्षुल्लिका दीक्षा दी, एवं अंत में वि.सं. 2047 पूर्णिमा के दिन ग्राम साबला में देह का त्याग किया। आपने अपने बाद मुनि वर्धमान सागरजी को आचार्य पद पर प्रतिष्ठित करने का लिखित आदेश दिया और वर्धमानसागर जी को पंचम पट्टाधीश घोषित किया गया।

आचार्य श्री अजित सागर जी के  दीक्षित 4 शिष्य वर्तमान में हैं जिनमें मुनि श्री चिन्मय सागर जी और आर्यिका श्री चैत्यमती जी आचार्य वर्धमानसागर जी के संघ के साथ तथा दो शिष्य मुनि श्री पुण्य सागर जी एवम आर्यिका श्री सौरभ मति जी सोनागिर जी में विराजमान हैं ।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
10
+1
0
+1
1
राखी जैन

About the author

राखी जैन

Add Comment

Click here to post a comment

You cannot copy content of this page