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आगरा में "वंडरफुल जैनिज़्म" सत्र का शुभारंभ : मुनि श्री समत्व सागर जी ने युवाओं को दिया संतुलित जीवन का मंत्र


निर्मल सेवा सदन, छीपीटोला (आगरा) में आयोजित “वंडरफुल जैनिज़्म” सत्र में पूज्य मुनि श्री 108 समत्व सागर जी महाराज ने युवाओं, महिलाओं एवं पुरुषों को जैन दर्शन, आत्मविकास और संतुलित जीवन का संदेश दिया। पढ़िए श्रीफल साथी राहुल जैन की यह रिपोर्ट।


आगरा। निर्मल सेवा सदन, छीपीटोला में आयोजित जैन धर्म आधारित प्रेरक श्रृंखला “वंडरफुल जैनिज़्म” का शुभारंभ उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा, युवतियां, महिलाएं एवं पुरुष उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और ऊर्जा का वातावरण देखने को मिला।

युवाओं को मिला जीवन जीने का मार्ग

संयुक्त धर्मसभा में पूज्य मुनि श्री 108 समत्व सागर जी महाराज ने कहा कि “वंडरफुल जैनिज़्म” का उद्देश्य आधुनिक समाज, विशेषकर युवाओं को जैन दर्शन के माध्यम से संतुलित, संयमित और सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा देना है।

आधुनिक समस्याओं का आध्यात्मिक समाधान

मुनि श्री ने युवाओं के जीवन से जुड़े विषयों—डिप्रेशन, करियर का तनाव, रिश्तों में बढ़ती दूरी, क्रोध प्रबंधन, रात्रि भोजन त्याग के वैज्ञानिक लाभ तथा दिखावे की जीवनशैली से दूर रहने के व्यावहारिक उपायों पर सरल एवं तार्किक मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता ही स्थायी शांति और आत्मसंतोष का वास्तविक मार्ग है।

“सब कुछ है, फिर भी शांति क्यों नहीं?”

अपने प्रेरक प्रवचन में मुनि श्री ने कहा कि आज का व्यक्ति धन, प्रतिष्ठा और दिखावे के पीछे निरंतर दौड़ रहा है, फिर भी मानसिक शांति प्राप्त नहीं कर पा रहा। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन करते हुए धर्म, गुरु और भगवान के लिए समय निकालने की प्रेरणा दी। उनके ओजस्वी उद्बोधन ने विशेष रूप से युवाओं में नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच का संचार किया।

बड़ी संख्या में समाजजन रहे उपस्थित

कार्यक्रम का संचालन विजय जैन शास्त्री ने किया। इस अवसर पर श्रुत मंथन वर्षायोग समिति के मनोज जैन, मुरारी लाल जैन, अनिल जैन, रमेश जैन, मुकेश जैन, सतेंद्र जैन, राजीव जैन, आशीष जैन, आशु जैन, चक्रेश जैन, रोहित जैन, विवेक जैन, अनिकेत जैन, आदिश जैन, गौरव जैन, सचिन जैन, मीडिया प्रभारी राहुल जैन सहित नमोस्तु शासन संघ, विभिन्न मंडलों एवं सकल जैन समाज के अनेक सदस्य उपस्थित रहे।

धर्म से मिलता है जीवन का वास्तविक आनंद

वक्ताओं ने कहा कि जैन दर्शन केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन को तनावमुक्त, अनुशासित और सफल बनाने की वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक जीवनशैली है। “वंडरफुल जैनिज़्म” जैसे आयोजन युवाओं को संस्कार, आत्मविश्वास और सकारात्मक दिशा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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