आचार्य श्री 108 आदित्यसागर जी महाराज ससंघ के 28वें चातुर्मास के मंगल प्रवेश पर जयपुर के जनकपुरी जैन मंदिर में भव्य धर्मसभा आयोजित हुई। हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर धर्म, तप, स्वाध्याय और आत्मकल्याण का संदेश ग्रहण किया। पढ़िए श्रीफल साथी की यह रिपोर्ट।
जयपुर। परम पूज्य आचार्य श्री 108 आदित्यसागर जी महाराज ससंघ के 28वें चातुर्मास के मंगल प्रवेश के अवसर पर जनकपुरी दिगंबर जैन मंदिर परिसर में भव्य धर्मसभा का आयोजन किया गया। जयपुर के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु, समाजजन एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। संपूर्ण वातावरण भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास से ओत-प्रोत रहा।
28 स्वागत द्वारों से हुआ भव्य मंगल प्रवेश
आचार्य श्री का मंगल विहार बरकत नगर जैन मंदिर से प्रारंभ हुआ। मार्ग में श्रद्धालुओं द्वारा निर्मित 28 भव्य स्वागत द्वारों से होते हुए विशाल शोभायात्रा जनकपुरी जैन मंदिर पहुँची। मंदिर के नव-निर्मित मुख्य प्रवेश द्वार का उद्घाटन पदम तरुण बैद परिवार द्वारा किया गया। युवा मंच ने 28 दीपों से मंगल आरती की, जबकि महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं ने 28 थालों से पाद-प्रक्षालन कर श्रद्धाभाव व्यक्त किया।
पूजन, पाद-प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट
धर्मसभा का शुभारंभ मंगलाचरण एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। चंद्रप्रभा–नेमीचंद शाह परिवार द्वारा आचार्य श्री का पाद-प्रक्षालन किया गया। मनीष–शीला सेठी परिवार को प्रथम शास्त्र भेंट का सौभाग्य प्राप्त हुआ तथा अन्य श्रेष्ठियों ने 28 शास्त्र भेंट कर गुरु भक्ति प्रकट की। श्रद्धालुओं ने पूजन-अर्चन एवं भक्ति के माध्यम से धर्मलाभ अर्जित किया।
चातुर्मास आत्मजागरण का स्वर्णिम पर्व
अपने मंगल प्रवचन में आचार्य श्री आदित्यसागर जी महाराज ने कहा कि चातुर्मास केवल ऋतु परिवर्तन नहीं, बल्कि आत्मजागरण, आत्मकल्याण, तप, साधना और आध्यात्मिक उन्नयन का स्वर्णिम अवसर है। चातुर्मास में साधु-संत एक स्थान पर स्थिर रहकर तप, ध्यान और स्वाध्याय करते हैं, जिससे समाज में स्थायी संस्कारों और नैतिक चेतना का विकास होता है।
संयम, सेवा और आत्मशुद्धि का संदेश
आचार्य श्री ने कहा कि संतों की साधना समाज में धर्म, शांति, सद्भाव और संस्कारों की हरियाली लाती है। उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति को मन की स्थिरता, आत्मसंयम, आत्मनिरीक्षण और आत्मशुद्धि अपनाने का संदेश दिया। साथ ही क्रोध, द्वेष और कटुता से दूर रहकर सेवा, सदाचार, सहिष्णुता और समभाव के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। युवाओं, महिलाओं और बच्चों को धर्म, तप, स्वाध्याय एवं सेवा से जीवन को सार्थक बनाने की प्रेरणा भी दी।
चातुर्मास समिति की घोषणा
धर्मसभा के दौरान प्रबंध समिति की ओर से राकेश जैन ने पदम जैन बिलाला के नेतृत्व में गठित चातुर्मास समिति के पदाधिकारियों एवं सदस्यों की घोषणा की। धर्मसभा के समापन पर श्रद्धालुओं ने चातुर्मास के दौरान नियमित धर्माराधना, स्वाध्याय, तप एवं सेवा कार्यों में सहभागी बनने का संकल्प लिया।
हजारों श्रद्धालुओं की रही उपस्थिति
इस अवसर पर जनकपुरी, ज्योति नगर, त्रिवेणी नगर, बरकत नगर, मधुबन, कीर्ति नगर, श्रीजी नगर, श्योपुर, मोहनबाड़ी, जय जवान कॉलोनी सहित जयपुर के विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे। समाज की अनेक धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं ने भी धर्मसभा में सहभागिता की।













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