आकाश की अनंतता, पर्वतों की निस्तब्धता, नदियों की कलध्वनि, वृक्षों की हरित छाया और वायु की जीवनदायिनी स्पर्श-स्मृति ने उसके भीतर यह अनुभूति अवश्य जगाई...
5 जून विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष आलेख : पर्यावरण के प्रति प्राचीन भारतीय सांस्कृतिक एवं धार्मिक दृष्टिकोण




















