Tag - Dharmasabha

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धर्म के लिए समय निकालना पड़ता है : आर्यिका श्री सुप्रज्ञ मति जी ने बड़वानी में दी मंगल देशना 

बड़वानी में विराजित आचार्य श्री सुनील सागर जी की शिष्या आर्यिका श्री सुप्रज्ञ मति जी माताजी ने गुरुवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जब शेर जैसा जीव...

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आर्यिका माताजी ने कहा बिना सांस के शरीर नहीं चल सकता : आर्यिका विज्ञमति माताजी ने धर्मसभा में ज्ञान और अज्ञान का फर्क बताया

दिगंबर जैन परिषद के तत्वावधान में आचार्य श्री शान्ति सभागार एम.डी. जैन, हरिपर्वत पर आचार्य श्री इंद्र नंदी जी महाराज ससंघ एवं आर्यिका श्री विशुद्धमति माताजी...

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मृत्यु आने पर सब यहीं धरा रहता है, जीव अकेला जाता है : मुनिश्री विनिश्चय सागर ने बताया आत्मा का वास्तविक कर्तव्य स्वयं को जानना है

शरीर के कार्य और संसार की बातें समय के साथ भूल जाती हैं, लेकिन आत्मा का वास्तविक कर्तव्य स्वयं को समझना और अपने शुद्ध स्वरूप को पहचानना है। मनुष्य को विवेक और...

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सृष्टि की अवस्था और सृष्टि का ज्ञान बहुत जरूरी है : नवीन वेदियों का विधि विधान के साथ हुआ शिलान्यास 

सृष्टि की अवस्था को जानें सृष्टि का ज्ञान बहुत जरूरी है। जब तक तुम सृष्टि की अवस्था का ज्ञान नहीं करोगे तुम्हारे लिए सृष्टि समझ में ही नहीं आएगी। यह उद्गार...

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संत पंथ और संघ के नाम पर जिन शासन को बदनाम न करें: मुनिश्री आदित्य सागर जी ने संघ की मान्यताओं से बाहर निकलने की दी प्रेरणा 

जैन समाज आज संत, पंथ और संघ में बंट गया है। आप प्रतिदिन ‘णमो लोए सव्ब साहूणम’ लोक के सभी साधुओं को नमस्कार का उच्चारण करते हैं और माला फेरते हैं लेकिन, साधु...

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परिवार के संस्कार ही व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं : आचार्य विनिश्चयसागर 31 मई को होगा एक दिवसीय सिद्धचक्र विधान

जीवन की सच्ची दिशा का मनुष्य के जीवन में परिवार, संस्कार और कर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। परिवार केवल संबंधों का समूह नहीं, बल्कि जीवन की पहली पाठशाला...

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अशोक नगर के भक्तों ने किए मुनिश्री सुधासागर जी को श्रीफल भेंट : महापूजन कर नगर पधारने का किया निवेदन 

मेरा काम बने दुनिया से मुझे कोई मतलब नहीं है ये खतरनाक विचार हैं। हम अपने, पड़ोसी समाज और नगर के हित के लिए क्या सोच रहे हैं ये विचार करना है। यह उद्गार रामलीला...

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मंदिर छोटा या बड़ा नहीं, भाव बड़ा होना चाहिए : भेद ज्ञान को जागृत करना ही मुक्ति का मार्ग, आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने दिए महत्वपूर्ण सूत्र 

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का यहां के विभिन्न मंदिरों उपनगरों में प्रवास चल रहा है। श्री पार्श्वनाथ जिनालय निर्माण नगर में प्रवेश के अवसर पर हुई...

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णमोकार मंत्र एक आसन पर एकाग्रता पूर्वक करने से मिलता पुण्य : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने णमोकार मंत्र के 35 अक्षरों का बताया महत्व 

आचार्य श्री वर्धमान सागर जी संघ सहित श्याम नगर में विराजित हैं। आज की धर्मसभा में उन्होंने णमोकार मंत्र का महत्व बताया। आचार्यश्री ने कहा कि छोटा सा णमोकार...

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पुण्य से ही सुख संपत्ति की प्राप्ति होती है : आचार्यश्री निर्भयसागर जी के प्रवचनों से बढ़ रही प्रभावना

सांसारिक प्राणी अपने कर्मों से ही सुख और दुख प्राप्त करता है। संसार में जीवन यापन करते हुए मनुष्य जैसे कर्म करता है, उसी अनुरूप उसे परिणामों की प्राप्ति होती...

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