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मोबाइल से दूरी जीवन को बनाएगी सहज : श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर में अतिथियों ने नई पीढ़ी के लिए इनके आयोजन को बताया जरूरी 


शिक्षण शिविरों के आयोजन से साधर्मी बंधुओं माता-बहनों युवाओं एवं बच्चों को ज्ञान और संस्कारों के साथ साथ उनके व्यक्तित्व का विकास भी होता है। यह उद्गार बड़े जैन मंदिर में श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर के समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह में आए हुए अतिथियों ने शिविरार्थियों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। मुरैना से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह रिपोर्ट…


मुरैना। शिक्षण शिविरों के आयोजन से साधर्मी बंधुओं माता-बहनों युवाओं एवं बच्चों को ज्ञान और संस्कारों के साथ साथ उनके व्यक्तित्व का विकास भी होता है। यह उद्गार बड़े जैन मंदिर में श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर के समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह में आए हुए अतिथियों ने शिविरार्थियों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। अतिथियों ने कहा कि वर्तमान में सभी लोग मोबाइल में खोये हुए हैं। मोबाइल की आदत सभी वर्ग के लोगों को लग चुकी है, खासकर युवा और बच्चे पूरी तरह मोबाइल फोबिया से ग्रसित हैं। शिविरों के माध्यम से उन्हें मोबाइल फोबिया के दुष्परिणामों से अवगत कराया गया और धर्म ध्यान, व्यायाम, जप, तप, स्वास्थ्य के सूत्र सिखाकर स्वस्थ एवं सुखी जीवन जीने की कला सिखाई गई। हमें सुखी, स्वस्थ एवं शांतिपूर्वक जीवन यापन के लिए संस्कारवान होना आवश्यक है और इसे धार्मिक शिक्षण शिविरों से बच्चों में संस्कारों का बीजारोपण ही होता है। बच्चों को धर्म, संस्कार, संस्कृति एवं रीति-रिवाज़ों से जोड़े रखने में शिक्षण शिविरों की अहम भूमिका रहती है।

400 से अधिक समाजजनों ने की सहभागिता 

नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती बड़ा मंदिर में श्रमण संस्कृति संस्थान, सांगानेर जयपुर के तत्वावधान में आयोजित श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर का समापन समारोह रविवार को हुआ। सात दिवसीय शिविर का शुभारंभ 8 को हुआ और 15 जून को इसका समापन। इस शिविर में 400 से अधिक बंधुओं, माता-बहनों और बालक-बालिकाओं ने सहभागिता कर जैन धर्म, संस्कृति एवं नैतिक मूल्यों का ज्ञान प्राप्त किया।

इनकी गरिमामयी मौजूदगी में हुआ समापन

शिविर का संचालन एवं मार्गदर्शन चंबल संभाग के क्षेत्रीय प्रभारी विद्वत् नवनीत जैन शास्त्री (मुरैना) के निर्देशन में हुआ। मुख्य संयोजक सुरेशचंद्र जैन (शिक्षक) एवं सह-संयोजक अनिल जैन नायक गढ़ी वाले ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समापन समारोह का संचालन अनूप जैन भंडारी ने किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रेमचंद जैन साड़ी वाले, विशेष अतिथि वर्धमान जैन ‘आबकारी विभाग’ सम्मिलित हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य अनिल जैन ने की।

विजेताओं को प्रशस्ति पत्र एवं पुरस्कार देकर सम्मानित किया 

शिविर में विभिन्न आयु वर्गों के लिए अलग-अलग कक्षाएं संचालित की गईं। विद्वत अभिषेक जैन शास्त्री ने पूजन पद्धति एवं जैन भूगोल, विद्वत गौरव जैन शास्त्री ने छहढाला, मनन जैन शास्त्री ने बालबोध भाग-1 तथा हिमांशु जैन शास्त्री ने बालबोध भाग-2 का अध्यापन कराया। शिविर में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विजेता प्रतिभागियों को नरेंद्र कुमार कुलभूषण जैन ‘जैना टायर’ एवं पंकजकुमार सचिन जैन मावा वाले के सौजन्य से पुरस्कार वितरित किए गए। समारोह में सभी विजेताओं को प्रशस्ति पत्र एवं पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। शिविर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों एवं धार्मिक प्रतियोगिताओं ने प्रतिभागियों में आत्म विश्वास, अनुशासन एवं संस्कारों के प्रति गहरी रुचि विकसित की।

सहयोगियों का जताया आभार 

समापन समारोह में समाज के सभी वर्गों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। सकल जैन समाज ने आयोजन की सफलता पर सभी सहयोगियों, शिक्षकों, अभिभावकों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार जताया और कहा कि भावी पीढ़ी के संस्कार निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं सफल पहल है।

पुरस्कार पाकर बच्चों के चेहरे खिले

समारोह में समाज के नन्हें-मुन्ने बच्चों ने रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किए। उनकी प्रतिभा को देखकर सभी ने उनका उत्साह वर्धन किया। आयोजकों ने बच्चों को स्मृति चिन्ह, प्रशस्ति पत्र एवं पुरस्कार देकर बहुमान किया। आयोजन समिति के मुख्य संयोजक सुरेशचंद एवं अनिल जैन नायक ने बताया कि समापन समारोह में अध्यापन कार्य करा रहे सांगानेर के विद्वानों का समाज के श्रेष्ठी वर्ग ने तिलक, शॉल, श्रीफल, मणिमाला, स्मृति चिन्ह देकर बहुमान किया।

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