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रत्न्त्रय धर्म 13 प्रकार का चारित्र, 14 वें गुण स्थान पहुंचने का माध्यम : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने सरल शैली में जैन सिद्धांतों का ज्ञान कराया 

श्री चंद्र प्रभ जिनालय बड़ के बालाजी में संघ सहित विराजित आचार्य श्री वर्धमान सागर जी द्वारा दिया गया संवाद, गीत और धर्म-ज्ञान अत्यंत प्रेरणादायक रहा। पाठशाला...

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40 श्रावकों ने गोचरी दया में भाग लिया जिनशासन की सेवा की : गोचरी दया के अवसर पर लघु नाटिका का किया मंचन

एक दिन का साधु जीवन पुण्यदायक तप के समान है। एक का साधु जीवन व्यतीत कर गृहस्थ श्रावकों को तप साधना से रूबरू होने का अवसर प्रदान करती है गोचरी दया। यह विचार...

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अहंकार और वहम से दूर रहना ही धर्म का मार्ग: क्षुल्लक महोदय सागर : पर्यूषण पर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म पर हुआ प्रवचन

धरियावद स्थित श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में पर्यूषण पर्व के तीसरे दिन क्षुल्लक 105 श्री महोदय सागर जी महाराज ने श्रद्धालुओं को अहंकार और वहम से दूर रहने...

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सहारनपुर में 30 पीछीधारी संतों का दुर्लभ सानिध्य : आपका अभिमान बताता है, आप गुणवान नहीं हैं – आचार्य विमर्शसागर जी

सहारनपुर में आचार्य श्री विमर्शसागर जी महामुनिराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य यदि अपने छोटे-से गुणों पर अभिमान करता है तो वह वास्तविक गुणवान...

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घर-परिवार समाज में सभी के साथ प्रेम, प्रीति और विनय का भाव रखें-श्री आदित्य सागरजीः निंदा नहीं, गुणों की प्रशंसा करें

व्यक्ति का व्यवहार ही उसकी पूंजी है। उसके व्यवहार से ही वह पहचाना जाता है। विनम्रता व्यवहार में दिखना भी चाहिए तभी किसी व्यक्ति से उसका जुड़ाव होगा। प्रीति नहीं...

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गुरु के सानिध्य, विनयपूर्वक अर्जित ज्ञान से शिष्य का जीवन का निर्माण होता हैं-आचार्यश्री वर्धमान सागरजीः शिव सागरजी का वात्सल्य कभी भूल नहीं सकते 

आचार्यश्री वर्धमान सागरजी मुनिश्री पुण्य सागर एवं साधुओं सहित धरियावद विराजित हैं। आपके संघ सानिध्य में आचार्यश्री शिव सागरजी का 57वां अंतरविलय समाधि वर्ष...

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