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भगवान नमिनाथ का मोक्ष कल्याणक 16 अप्रैल को: सिद्धांचल पर्वत पर होगा विशेष कार्यक्रम और विधान 


जैन धर्म के 21वें तीर्थंकर भगवान नमिनाथ का मोक्ष कल्याणक दिवस वैशाख कृष्ण चौदस को सिद्धांचल पर्वत कोटेश्वर रोड किले पर ग्वालियर में धूमधाम से मनाया जाएगा। समाजसेवी सौरभ जैन (वरेह वाले) अंबाह ने बताया कि भगवान नमिनाथ की विश्व की सबसे बड़ी अद्वितीय प्रतिमा का सुबह सात बजे महामस्तकाभिषेक किया जाएगा। मुरैना/ग्वालियर से पढ़िए, मनोज जैन नायक की यह रिपोर्ट…


  मुरैना/ग्वालियर। जैन धर्म के 21वें तीर्थंकर भगवान नमिनाथ का मोक्ष कल्याणक दिवस वैशाख कृष्ण चौदस को सिद्धांचल पर्वत कोटेश्वर रोड किले पर ग्वालियर में धूमधाम से मनाया जाएगा। समाजसेवी सौरभ जैन (वरेह वाले) अंबाह ने बताया कि भगवान नमिनाथ की विश्व की सबसे बड़ी अद्वितीय प्रतिमा का सुबह सात बजे महामस्तकाभिषेक किया जाएगा। उसके बाद विधान, पूजन और निर्वाण लाडू चढ़ाया जाएगा। देव शास्त्र गुरु भक्त वीरेंद्र जैन, सुनील जैन, सौरभ जैन, हिमांशु जैन, अंश जैन, चिराग जैन, बाबू जैन, नीति जैन, याना जैन, बाबा ने धूमधाम से मोक्ष कल्याणक मानने की बात कही। इस अतिशय क्षेत्र पर आए दिन अतिशय होता रहता है। नाग देवता भगवान के दर्शन और क्षेत्र की रक्षा के लिए आते रहते है। 2451 वर्ष के केवली काल के बाद, जब आयुकर्म एक माह शेष रह गया तब 21 वें तीर्थंकर श्री नमिनाथ जी पहुंच गए श्री सम्मेद शिखरजी और वैशाख कृष्ण की चतुर्दशी, जो इस वर्ष 16 अप्रैल को है, उसी दिन खड़गासन से 1000 मुनिराजों के साथ मित्रधर कूट से सिद्धालय गए। इनका तीर्थ प्रवर्तन काल 5 लाख, 1800 वर्ष का रहा। मित्रधर कूट की निर्मल भाव से वंदना करने से एक करोड़ उपवास का फल मिलता है और इसी कूट से 900 कोड़ाकोड़ी, एक अरब, 45 लाख, 7 हजार 940 मुनिराज सिद्धालय गए हैं।

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