आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी ससंघ’ का 2026 का पावन वर्षायोग इस वर्ष राजधानी दिल्ली’ में होने जा रहा है। इस ऐतिहासिक समाचार से पूरे भारतवर्ष के जैन समाज में हर्ष है। विगत कई वर्षों से दिल्ली नगर समाज शहर में वर्षायोग के लिए प्रयासरत थे। इंदौर से पढ़िए, यह खबर…
इंदौर। आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी ससंघ’ का 2026 का पावन वर्षायोग इस वर्ष राजधानी दिल्ली’ में होने जा रहा है। इस ऐतिहासिक समाचार से पूरे भारतवर्ष के जैन समाज में हर्ष है। विगत कई वर्षों से दिल्ली नगर समाज शहर में वर्षायोग के लिए प्रयासरत थे। जैसे ही संकेत प्राप्त हुए कि इस वर्ष का चातुर्मास का परम सौभाग्य दिल्ली नगर की जैन समाज को प्राप्त होने जा रहा है। समाज में उल्लास का वातावरण है। राजेश जैन दद्दू ने कहा कि जैन श्रमण परंपरा में चातुर्मास’ का विशेष महत्व है। वर्षाकाल के चार महीनों में आचार्यश्री एक स्थान पर विराजकर धर्म-ध्यान, स्वाध्याय, तप एवं प्रवचनों के माध्यम से समाज को सत्य, अहिंसा, मैत्री एवं ‘जियो और जीने दो’ का संदेश देते हैं। आचार्यश्री के सान्निध्य में पर्यूषण महापर्व में हजारों श्रावक-श्राविकाएं शिविर के माध्यम से आत्म-कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। गुरु भक्त डॉ. जैनेंद्र जैन ने कहा कि दिल्ली समाज में भारी उत्साह है। राजधानी दिल्ली में 21वीं सदी के श्रमण संस्कृति के पट्टाचार्य श्री का चातुर्मास होना गौरव का विषय है। समाजजनों ने चातुर्मास की भव्य तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं। विभिन्न समितियों का गठन कर व्यवस्था, आवास, आहार, विहार प्रवचन एवं धार्मिक आयोजनों की रूपरेखा बनाई जा रही है।
आचार्यश्री का परिचय
आचार्य श्री विरागसागर महाराज के सुशिष्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज युवाओं के प्रेरणास्रोत’ एवं आगमानुसार आचरण करने वाले श्रमण संस्कृति आध्यात्मिक गुरु के रूप में पद प्रतिष्ठित हैं। उनका प्रमुख संदेश ’नमोस्तु शासन जयवंत हो’ जन-जन तक पहुंच रहा है। 31 मार्च 2007 को औरंगाबाद में महावीर जयंती के पावन अवसर पर उन्हें आचार्य पद पर प्रतिष्ठित किया गया था। अभी तक लगभग दो लाख किमी तक का पदविहार कर चुके हैं। वर्तमान समय में आचार्य श्री द्वारा प्रणीत ग्रंथों को सबसे ज्यादा पढ़ा जा रहा है। आचार्यश्री द्वारा की जा रही धर्म प्रभावना से समाज में नैतिक मूल्यों, संस्कारों एवं अध्यात्म का व्यापक प्रचार-प्रसार हो रहा है। दिल्ली चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन प्रातः जिनेंद्र अभिषेक, नित्य नियम पुजन शांतिधारा, आचार्यश्री के मंगल प्रवचन एवं तत्वचर्चा के कार्यक्रम होंगे। दिल्ली की सकल दिगंबर जैन समाज ने आचार्यश्री के चातुर्मास के संकेत को सहर्ष स्वीकार करते हुए पुण्यार्जन का लाभ लेने का संकल्प लिया है। इस वर्ष के वर्षायोग में देशभर से श्रद्धालुओं के दिल्ली पहुंचने की संभावना है।













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