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विद्वत्परिषद् उत्तरप्रदेश एवं स्वाध्याय मण्डल महरौनी के संयुक्त तत्वावधान में हुई आयोजित : तत्त्वार्थसूत्र संगोष्ठी सम्पन्न


श्री दि. जैन महावीर पंचबालयती जिनालय, ललितपुर रोड, महरौनी में विद्वत परिषद् उत्तर प्रदेश एवं स्वाध्याय मंडल महरौनी के संयुक्त तत्वावधान में तत्त्वार्थसूत्र संगोष्ठी (प्रथम अध्याय आधारित) का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी के अध्यक्ष डॉ. अरविंद कुमार जैन शास्त्री (राष्ट्रीय संगठन मंत्री-ट्रस्टी एवं दिगम्बर जैन महासमिति सांगानेर संभाग जयपुर) रहे। पढ़िए राजीव सिंघई मोनू की रिपोर्ट…


महरौनी। श्री दि. जैन महावीर पंचबालयती जिनालय, ललितपुर रोड, महरौनी में विद्वत परिषद् उत्तर प्रदेश एवं स्वाध्याय मंडल महरौनी के संयुक्त तत्वावधान में तत्त्वार्थसूत्र संगोष्ठी (प्रथम अध्याय आधारित) का आयोजन किया गया। इस संगोष्ठी के अध्यक्ष डॉ. अरविंद कुमार जैन शास्त्री (राष्ट्रीय संगठन मंत्री-ट्रस्टी एवं दिगम्बर जैन महासमिति सांगानेर संभाग जयपुर) रहे। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. विकास जैन बानपुर (राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश प्रभारी) और प. सोमचंद्र जी शास्त्री महरौनी उपस्थित थे।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कपूरचंद जैन भायजी, विशिष्ट अतिथि राजकुमार जी सिंघई और आनंद जी सर्राफ दाऊ रहे। सभी अतिथियों का स्वागत स्वाध्याय मंडल परिवार ने किया। संगोष्ठी का मंगलाचरण कु. मैत्री जैन, नित्या जैन और जान्या जैन ने किया।

गोष्ठी के मुख्य बिंदु इस प्रकार रहे:

1. तत्त्वार्थसूत्र का महत्व: दो हजार वर्ष पूर्व आ. उमास्वामी ने इसे सर्वजन हिताय की भावना से लिखा, यह जैन समाज का सर्वमान्य एवं महत्वपूर्ण ग्रंथ है।

2. टीकाएं: इस ग्रंथ पर हज़ारों टीकाएं लिखी गई हैं।

3. मोक्षमार्ग: यह ग्रंथ मोक्षमार्ग को प्रशस्त करता है और जैन दर्शन का संपूर्ण परिचय देता है।

4. जीवन में उपयोगिता: इसके अनेक सूत्र पारलौकिक ही नहीं, लौकिक जीवन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

5. आचार-विचार: यह ग्रंथ हमारे आचार, व्यवहार, और ज्ञान को तराशने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

वक्ताओं में जान्या जैन, नित्या जैन, मैत्री जैन, त्रिशला जैन, श्रीमती अंगूरी पवैया, धन्य कुमार पवैया, और कई अन्य ने अपने-अपने विषय प्रस्तुत किए। संगोष्ठी का सफल संयोजन और संचालन राजीव चौधरी एवं आशीष चौधरी ने किया। सभी वक्ताओं को प्रोत्साहन स्वरूप पुरस्कार एवं फल का वितरण आनंद जी सर्राफ दाऊ, कैलाश चंद्र चौधरी, धन्य कुमार पवैया और निखलेश जी सिंघई द्वारा किया गया। अंत में, गोष्ठी में पधारे सभी साधर्मीजनों का आभार प्रदर्शन कैलाश चंद्र चौधरी द्वारा किया गया।

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