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दृष्टि बदलते ही डाकू साधु बन जाते हैं : आचार्य श्री विशुद्ध सागरजी महाराज ने प्रवचन में दृष्टि के बारे में बताया


वस्तुओं को बदलने की कोशिश ना करें। बदलना है तो दृष्टि को बदलो। दृष्टि बदलते ही डाकू साधु हो जाते हैं, जो विश्व को बदलना चाहते थे वह मर गए। यह बात निराला रंग बिहार में पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज ने प्रवचन में कही। भिंड से पढ़िए, सोनल जैन की रिपोर्ट…


भिंड। वस्तुओं को बदलने की कोशिश ना करें। बदलना है तो दृष्टि को बदलो। दृष्टि बदलते ही डाकू साधु हो जाते हैं, जो विश्व को बदलना चाहते थे वह मर गए। यह बात निराला रंग बिहार में पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर महाराज ने प्रवचन में कही। उन्होंने कहा कि जीव अपने परिणामों की विशुद्धि के कारण आपके अंदर श्रद्धान ना होता तो साधु के पास जा नहीं पाते। जिसका मोक्ष का कारण बन गयाज़ वह साधु बन जाते हैं, जो भव्य जीव आस्था श्रद्धा विश्वास के साथ जिनेंद्र भगवान की देशना को सुनता है। वह भविष्य का भगवान होता है। एक बार विश्वास हो जाए कि धर्म है जगत में प्रत्येक जीव सुखी रहे, ऐसा विचार रखें यही धर्म है सुखी रहे जीव जगत के। उन्होंने कहा कि पर्वतों को घूमकर आना सरल है। नदियों में डूब कर आना सरल है लेकिन, सुखी रहे सब जीव जगत में यह कहना कठिन है अहिंसा दया ही धर्म है इसके लिए ताकत चाहिए।

जनगणना में जैन ही लिखें

आचार्य श्री ने आगे कहा कि प्रत्येक घर में जिनवाणी रखना प्रारंभ कर दो घर-घर में आभूषण, साड़ियां रख सकते हो तो शास्त्र क्यों नहीं? जब किसी प्रकार की विपदा स्थिति बने, जिससे ग्रंथ सुरक्षित रहे।घर में बंकर होना चाहिए, मिसाइल गिरे तो ग्रंथ सुरक्षित रहें। 200-400 लोगों के चक्कर में विश्व समाप्त हो रहा है। ईरान-इजरायल यूक्रेन युद्ध के कारण न जाने देश में कितना नुकसान हो रहा है। आचार्य श्री ने आगे कहा कि देश में जनगणना चल रही है। जनगणना में जैन होने का जो कलम है, जो जैन है वह जैन ही लिखें। जिससे जैन समाज की गणना हो जाए।

गुरु के सामने बोलना अच्छा नहीं

वहां पर उपस्थित नगर गौरव मुनि श्री यशोधर सागरजी महाराज ने प्रवचनों में कहा कि भगवान महावीर स्वामी की परंपरा में आज धरती के भगवान आचार्य श्री विशुद्ध सागरजी महाराज हैं। आज बोलते हुए डर लग रहा है कि गुरु के सामने बोलना अच्छा नहीं है। जहां प्रवचनकार बैठे हैं। उनके सामने बच्चा बोलेज़ यह अच्छा नहीं।10 नवंबर 2019 का वह दिन जब गुरुवर ने दीक्षा देकर मोक्ष मार्गी बना दिया। भारत में ऐसा एक गुरु देखा कई गलतियां की आंखों से हमेशा क्षमा किया।

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