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पवन घुवारा ने बनाए तीन विश्व रिकॉर्ड समाज ने सराहा : गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज, यूके से मिला सर्वश्रेष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता का खिताब


सामाजिक जागरूकता और नागरिक सक्रियता के क्षेत्र में 24 वर्षों के निरंतर संघर्ष के बाद मप्र के टीकमगढ़ जिले के निवासी समाजसेवी पवन घुवारा भूमिपुत्र ने एक साथ तीन विश्व रिकॉर्ड बनाकर इतिहास रच दिया है। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज किया गया है। बकस्वाहा से पढ़िए, रत्नेश जैन रागी की यह रिपोर्ट…


बकस्वाहा। सामाजिक जागरूकता और नागरिक सक्रियता के क्षेत्र में 24 वर्षों के निरंतर संघर्ष के बाद मप्र के टीकमगढ़ जिले के निवासी समाजसेवी पवन घुवारा भूमिपुत्र ने एक साथ तीन विश्व रिकॉर्ड बनाकर इतिहास रच दिया है। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज किया गया है। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स एक विश्व रिकॉर्ड प्रमाणन संस्था है, जो असाधारण उपलब्धियों को दर्ज करती है। यह गौरवशाली उपलब्धि एक दो नही तीन विश्व रिकॉर्ड हैं। गोल्डन बुक द्वारा प्रमाणित रिकॉर्ड के अनुसार भूमिपुत्र ने सामाजिक मुद्दों की 8,988 कतरनें संग्रहित कीं और सार्वजनिक समस्याओं पर 3,287 पत्र अधिकारियों को भेजे तथा पत्राचार के जवाब में 1,021 पावती पत्र संग्रहित किए।

गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय सम्मान भूमिपुत्र पवन घुवारा का नाम लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज संस्था ने 15 अप्रैल को यूनाइटेड किंगडम द्वारा सर्वश्रेष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता के रिकॉर्ड से सम्मानित किया है। 24 साल के संघर्ष में कुल 13 हजार 296 दस्तावेज़ों का यह संग्रह दिखाता है कि पवन घुवारा भूमिपुत्र ने न केवल मुद्दे उठाए, बल्कि उनका प्रलेखन किया और शासन-प्रशासन से संवाद भी कायम रखा। यह संग्रह सामाजिक-राजनीतिक इतिहास का जीवंत दस्तावेज बन गया है।

ज़मीनी हकीकत के बीच पुल बनाने की कोशिश 

स्याही से इंकलाब तक बेहतर कल का सपना देखने वाली आंखों का दस्तावेज़ हैं। ये पत्राचार किसी एक दफ्तर तक सीमित नहीं रहा। इसने सरकार की नीतियों और ज़मीनी हकीकत के बीच पुल बनाने की कोशिश की। हर पहलू पर सरकार का ध्यान खींचा गया। ये पत्र बताते हैं कि वित्तीय समावेशन की योजनाएं गांव तक पहुंचते-पहुंचते दम क्यों तोड़ देती रेलवे पर लिखे पत्र बताते हैं। ये पत्राचार फाइलों में बंद जवाबों का पुलिंदा नहीं है। ये सबूत है कि अगर नीयत हो तो एक आदमी भी सरकार से सवाल कर सकता है। समस्याएं आज भी जस की तस हैं, पर इतिहास जब लिखा जाएगा, तो ये दर्ज होगा कि किसी ने हार नहीं मानी थी, क्योंकि लोकतंत्र में एक कलम भी बदलाव ला सकती है। भूमिपुत्र पवन घुवारा ने विकास, कुपोषण उन्मूलन, शिक्षा अभियान, सार्वजनिक स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, हैंडपंप का सूखना, नल-जल योजना का फेल होना ललितपुर-सिंगरौली रेल लाइन,पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग ,पर्यटन, बुन्देलखण्ड विशेष पैकेज,सिस्टम को उसकी जिम्मेदारी याद दिलाना जैसे मुद्दों पर लगातार उच्चाधिकारियों से पत्राचार व संघर्ष किया।

इतिहास याद रखेगा कि हमने चुप रहना मंजूर नहीं किया

लोकपाल बिल पर केंद्रीय को सुझाव, मनरेगा व अन्य विभागों में भ्रष्टाचार के मामले लोकायुक्त में उठाने तथा कई जन आंदोलनों का नेतृत्व किया। इन कार्यों के लिए उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से मिलने का अवसर भी मिला। समस्याएं आज भी है फाइलों में बंद ये पत्र बताते हैं कि समस्याएं खत्म नहीं हुई। ये पत्र कब रंग लाएंगे पता नहीं, पर इतिहास याद रखेगा कि हमने चुप रहना मंजूर नहीं किया। भूमिपुत्र पवन घुवारा ने हर मंच पर जनता की आवाज़ बुलंद की। यह सम्मान अपने पिता लौह पुरुष, शेरे बुंदेलखंड मंत्री का दर्जा प्राप्त विधानसभा बड़ामलहरा के पूर्व विधायक स्व.कपूरचंद्र घुवारा और बुंदेलखंड की माटी को समर्पित किया है। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि प्राप्त होने पर भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी मध्यांचल के संरक्षक सुरेश जैन आईएएस, अध्यक्ष डीके जैन, महामंत्री राजकुमार जैन ‘घाटे’, प्रचार प्रमुख और प्रवक्ता राजेश जैन रागी, छतरपुर टाइम्स के सम्पादक वरिष्ठ पत्रकार सनत जैन सहित अनेक संस्था संगठनों के पदाधिकारियों ने शुभकामनाएं दी हैं।

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