योग्यता को नष्ट करने वाला जन्म-जन्म का पापी होता है। संसार का सबसे बड़ा पापी वो है। जीवन में कभी योग्यता को नष्ट मत होने देना। यह उद्गार पारस धाम शाढ़ौरा में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागर जी ने व्यक्त किए। शाढ़ौरा से पढ़िए, राजीव सिंघई मोनू की यह खबर…
शाढ़ौरा। योग्यता को नष्ट करने वाला जन्म-जन्म का पापी होता है। संसार का सबसे बड़ा पापी वो है। जीवन में कभी योग्यता को नष्ट मत होने देना। यह उद्गार पारस धाम शाढ़ौरा में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री सुधासागर जी ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि चाहे कितना ही कष्ट उठाना पड़े। आप भी राष्ट्रपति बन सकते हैं। आपके अंदर योग्यता है। इसको बनाए रखना जिंदगी में भले आप राष्ट्रपति ना बन पाए। सब राष्ट्रपति बन भी नहीं पाएंगे। पर योग्यता को बनाए रखें दूसरा राष्ट्रद्रोह का काम जीवन में कभी मत करना। योग्यता को नष्ट मत करना। मुनि श्री ने कहा कि जिंदगी में किसी के अभिशाप से मत घबराना। बस इतना कर लेना कि अपने ही बेटे का अभिशाप मत करना तुम्हारी पत्नी ही तुम को आयोग्य घोषित कर दें तुम देशद्रोही मत बन जाना भीख मांग लेना लेकिन, देशद्रोही कभी बनने मत बनना संसार में सबसे गंदा काम अपने ही देश से द्रोह करना है। ऐसे व्यक्ति को कभी माफी नहीं मिलती।
आपको अन्नपूर्णा की सिद्धि के साथ ही संग्रहणी की बीमारी नहीं होगी
उन्होंने कहा कि आप लोग प्रसाद चढ़ाते हैं। कहने में आ रहा है। भगवान को भोग लगा रहे हैं। समा मानी कर रहे हैं जबकि, उसमें नारियल की एक चिट्ठी चढ़ाकर सब कुछ भक्तों में प्रसाद के रूप में बांट देते हैं। ये हमारी संस्कृति का एक हिस्सा है। यदि आप भोजन करने के पहले ऐसा करते हैं तो आपको अन्नपूर्णा की सिद्धि के साथ ही संग्रहणी की बीमारी नहीं होगी। इसके लिए जो घर के पूज्य पुरुष है। सबसे पहले भोजन करेंगे। इसके बाद सभी ग्रहण करेंगे। इससे इतनी सिद्धि होती कि कितने ही लोग आ जाए कमी नहीं होगी। यहां तो द्रौपदी करती थी। बताते हैं उसके पास एक कटोरा था। वह उसमें से कितने ही लोग आ जाए उनको खिलाती चली जाती थी। सबसे आखिरी में वह भोजन करती थी। ये सब सिद्धियां आपको भी हो सकती है।
आज के दूषित वातावरण से हम बच नहीं पा रहे
उन्होंने कहा कि दुःख हमें दो कारण से आता है। बाहरी कारण दूसरा अंतरंग कारण आज वातावरण दूषित हो रहा है इससे हम नहीं बच पा रहे। दूसरा अंतरंग कारण है। जिसे आप संभाल सकते हैं। सुबह उठते ही आपके मुख से कुछ शुभ निकले। वह भगवान का नाम ले ऊं नमः सिद्धेभया बोलकर अपने मुंह से खोलें। पहले राजाओ के यहां मंगल गीत गाए जाते थे। उठते ही शुभ शब्द उसे सुनाये जाते थे। ये सब सगुन है, जो हमारे जीवन में मंगल को प्रवेश दिलाते हैं। एक महिला भरा कलश लेकर निकल रही है। इतने में ही आपका शगुन हो गया ऐसे कितने लोगों का शगुन हो जाता है और वह सभी को दिखता भी है। वहीं एक बिल्ली आपके रास्ते से निकले ना जाने कितने लोगों का अपशगुन कर देगी। वह पाप के उदय का संकेत है। बस अव आपको संभल जाना चाहिए ये संकेत ही काफी होते हैं।
तीर्थ की माटी से बन रहा है पारसनाथ तीर्थ धाम
इसके पहले मध्यप्रदेश महासभा संयोजक विजय धुर्रा ने कहा कि आज जिस भूमि पर हम बैठे हैं। आज से यह पारस धाम होने जा रही है। इस भूमि पर मुनि श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ के सान्निध्य में तीर्थ राज सम्मेद शिखर जी से लाई गई मिट्टी को कलशों में भर कर स्थापित किया जाना है। सौभाग्यशाली परिवार में आर्यिका मुदितमति माता जी के परिवार जन महेश कुमार मनोज कुमार चौवी को मुख्य कलश, वहीं जैन समाज अध्यक्ष डॉ.भरत जैन मुनि श्री निकंलक सागर जी महाराज के परिजन सुदीप जैन, संदीप जैन हलवाई भीलवाड़ा परिवार, राकेश जैन, अनिल बांझल सहित अन्य सैकड़ों भक्त ने कलश विराजित किए। जिनका सम्मान कमेटी अध्यक्ष डॉ. भरत जैन, मंत्री दिनेश टरका, कोषाध्यक्ष राकेश हलवाई ने किया।













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