अंबाह में आर्यिका रत्न 105 श्री संगममति माताजी ससंघ के सानिध्य में चातुर्मास कलश स्थापना महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और धार्मिक उल्लास के साथ संपन्न हुआ। देशभर से हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर धर्मलाभ अर्जित किया। पढ़िए श्रीफल साथी अजय जैन की यह रिपोर्ट।
अंबाह। धर्मनगरी अंबाह में श्री दिगंबर जैन समाज द्वारा आयोजित श्री चातुर्मास कलश स्थापना महोत्सव परम पूज्य गणिनी आर्यिका रत्न 105 श्री संगममति माताजी ससंघ के पावन सानिध्य में जैन बगीची परिसर में अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच सम्पन्न हुआ। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने जिनवाणी का श्रवण कर धर्मलाभ अर्जित किया।
मंगलाचरण और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण, गुरु पूजन एवं धार्मिक अनुष्ठानों के साथ हुआ। बालिकाओं ने भगवान जिनेंद्र देव एवं गुरुमां की महिमा पर आधारित भावपूर्ण धार्मिक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। पूरा परिसर भक्ति, श्रद्धा और जयघोष से गुंजायमान रहा।
आर्यिका माताजी ने बताया चातुर्मास का महत्व
अपने मंगल प्रवचनों में आर्यिका रत्न श्री संगममति माताजी ने धर्म, संयम, अहिंसा और आत्मकल्याण का संदेश देते हुए कहा कि मनुष्य जीवन दुर्लभ है और इसे धर्म आराधना, सदाचार तथा आत्मशुद्धि में लगाना चाहिए। उन्होंने कहा कि चातुर्मास आत्मचिंतन, तप, स्वाध्याय और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का श्रेष्ठ अवसर है।
धार्मिक विधि-विधान से सम्पन्न हुई कलश स्थापना
दोपहर में वैदिक एवं जैन परंपरा के अनुरूप धार्मिक मंत्रोच्चार के बीच चातुर्मास कलश स्थापना सम्पन्न हुई। दीप प्रज्ज्वलन, मंगलाचरण और विभिन्न धार्मिक क्रियाओं के साथ पूरे परिसर में भगवान जिनेंद्र देव एवं गुरुमां के जयघोष गूंजते रहे। श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से आर्यिका माताजी का आशीर्वाद प्राप्त किया।
चार माह तक होंगे धार्मिक एवं संस्कारमय आयोजन
चातुर्मास समिति अध्यक्ष जिनेश जैन ने कहा कि अंबाह के लिए यह अत्यंत सौभाग्य का विषय है कि आर्यिका रत्न श्री संगममति माताजी का चातुर्मास यहां सम्पन्न हो रहा है। उन्होंने बताया कि आगामी चार माह तक नियमित प्रवचन, स्वाध्याय, पूजा-अर्चना एवं संस्कारमय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे बच्चों और युवाओं को धर्म एवं संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
वात्सल्य भोज के साथ हुआ आयोजन का समापन
शाम को सकल दिगंबर जैन समाज द्वारा वात्सल्य भोज का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की। आयोजन को सफल बनाने में चातुर्मास समिति, समाज के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं स्वयंसेवकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।













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