गुरु पूर्णिमा के अवसर पर श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती बड़ा मंदिर, मुरैना में आचार्य श्री उदारसागरजी महाराज के सान्निध्य में धार्मिक आयोजन हुए। गुरु पूजन, पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट एवं प्रवचनों के माध्यम से आत्मकल्याण का संदेश दिया गया। पढ़िए श्रीफल साथी मनोज जैन नायक की यह रिपोर्ट।
मुरैना। गुरु पूर्णिमा पर्व के पावन अवसर पर श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन पंचायती बड़ा मंदिर, मुरैना में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ विविध धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गुरु वंदना कर धर्मलाभ अर्जित किया।
गुरु का स्थान सर्वोच्च
धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री उदारसागरजी महाराज ने कहा कि जैन धर्म में देव, शास्त्र और गुरु का सर्वोच्च स्थान है। गुरु आत्मकल्याण के मार्ग के सच्चे पथप्रदर्शक हैं, जो तप, त्याग, संयम और ज्ञान के माध्यम से जीव को सम्यकदर्शन, सम्यकज्ञान एवं सम्यकचारित्र की ओर अग्रसर करते हैं।
गुरु बिना ज्ञान संभव नहीं
मुनि श्री उपशांतसागरजी महाराज ने कहा कि “गुरु बिन ज्ञान न होय।” गुरु ही अज्ञानरूपी अंधकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। उनका तप, त्याग और आदर्श जीवन शिष्य के आत्मोन्नयन का आधार बनता है।
पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट
प्रातःकाल अभिषेक, शांतिधारा एवं जिनेन्द्र भगवान की पूजन के साथ समारोह का शुभारंभ हुआ। श्रावक-श्राविकाओं ने आचार्यश्री का पाद प्रक्षालन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। महिला मंडल द्वारा जिनवाणी (शास्त्र) भेंट कर गुरु भक्ति का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया गया।
संतों एवं समाज की गरिमामयी सहभागिता
समारोह में आचार्य श्री उदारसागरजी महाराज, मुनि श्री उपशांतसागरजी महाराज, ऐलक श्री उत्साहसागरजी महाराज, क्षुल्लक श्री उपकारसागरजी तथा क्षुल्लिका माताजी की गरिमामयी उपस्थिति रही। चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्ज्वलन के पश्चात विभिन्न महिला मंडलों ने अष्टद्रव्य पूजन एवं अर्घ्य समर्पित किए।
भक्ति से गुंजायमान रहा मंदिर परिसर
अरिहंत म्यूजिकल ग्रुप द्वारा गुरु महिमा एवं जिनेन्द्र भक्ति से ओत-प्रोत भजनों की प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों में वंदन कर धर्म, संयम, स्वाध्याय एवं आत्मचिंतन को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
आध्यात्मिक संदेश
आचार्यश्री ने कहा कि गुरु के उपदेशों को केवल सुनना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सत्य, अहिंसा, संयम और आत्मचिंतन को जीवन में उतारना ही गुरु पूर्णिमा का वास्तविक संदेश है।













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