गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर झुमरीतिलैया में मुनि श्री 108 सुयश सागर जी महाराज ससंघ का चातुर्मास कलश स्थापना महोत्सव श्रद्धा एवं भक्ति के साथ संपन्न हुआ। देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ अर्जित किया। पढ़िए श्रीफल साथी राज कुमार जैन अजमेरा की यह रिपोर्ट।
झुमरीतिलैया। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर जैन मंदिर, झुमरीतिलैया में आचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री 108 सुयश सागर जी महाराज ससंघ के वर्षायोग (चातुर्मास) का मंगल कलश स्थापना समारोह भव्य एवं भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ। विश्व शांति मंत्रों एवं विधि-विधान के साथ कलश स्थापना कर चातुर्मास का शुभारंभ किया गया।
श्रीफल अर्पित कर किया चातुर्मास का निवेदन
जैन समाज एवं विरागोदय चातुर्मास समिति के पदाधिकारियों ने मुनिश्री को श्रीफल अर्पित कर झुमरीतिलैया में चातुर्मास करने का विनयपूर्वक अनुरोध किया। समारोह में रायपुर, भिलाई, दुर्ग, रायगढ़, राउरकेला, रांची, गया, हजारीबाग, तामसा सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
चातुर्मास का बताया महत्व
कार्यक्रम में बताया गया कि वर्षाकाल में सूक्ष्म जीवों की रक्षा एवं अहिंसा की भावना को ध्यान में रखते हुए जैन संत एक ही स्थान पर रहकर चार माह तक धर्म, ध्यान, स्वाध्याय एवं साधना करते हैं। झुमरीतिलैया को इस वर्ष मुनिश्री का चातुर्मास प्राप्त होना समाज के लिए गौरव एवं सौभाग्य का विषय है।
प्रथम कलश का सौभाग्य इन परिवारों को
चातुर्मास के प्रथम कलश का सौभाग्य सौरभ, सुधा एवं हर्ष जैन पाटौदी परिवार (हजारीबाग) को प्राप्त हुआ। द्वितीय कलश गौरव जैन (भाटापारा, छत्तीसगढ़), तृतीय कलश आतिश जैन काला परिवार (तामसा), चतुर्थ कलश सुयश भक्त परिवार (तामसा) तथा पंचम कलश सुशील-अमित जैन परिवार (हजारीबाग) सहित अनेक श्रद्धालुओं ने कलश स्थापना का पुण्यार्जन किया।
भजनों से भक्तिमय हुआ वातावरण
कार्यक्रम का संचालन पंडित अभिषेक जैन शास्त्री, संजय जैन छाबड़ा (लट्टू) एवं अक्षय जैन ने किया। प्रतिष्ठाचार्य संजय भैया ब्रह्मचारी मुक्तगिरि ने संपूर्ण धार्मिक विधियां संपन्न कराईं। समाज के सुप्रसिद्ध गायक नवीन जैन पांडया एवं सुबोध जैन गंगवाल ने गुरु भक्ति से ओतप्रोत भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
सामूहिक सहयोग से सफल हुआ आयोजन
विरागोदय चातुर्मास समिति के संयोजक रौनक जैन कासलीवाल, राहुल जैन छाबड़ा, सौरभ जैन लुहाड़िया, सिद्धांत जैन सेठी, शैलेश जैन छाबड़ा, लोकेश जैन पाटौदी, विकास जैन सेठी, मनीष जैन गंगवाल एवं अन्य कार्यकर्ताओं ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महिला समाज, युवक समिति एवं समाज के वरिष्ठजनों की भी उल्लेखनीय सहभागिता रही।
धर्म और अहिंसा का संदेश
गुरु पूर्णिमा एवं चातुर्मास का यह आयोजन श्रद्धा, संयम, साधना और अहिंसा की भावना को जन-जन तक पहुँचाने वाला प्रेरणादायी पर्व बना। श्रद्धालुओं ने इसे आध्यात्मिक उन्नति का अनुपम अवसर बताया।













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