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श्रुत स्कंधज्ञान विधान का किया आयोजन: आर्यिका गणिनी विशिष्ट मती माताजी और सिद्धश्री मती माताजी का हुआ मंगल मिलन, श्रद्धालुगण हुए अभिभूत 


 नगर में आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज की शिष्या आर्यिका सिद्धश्री मती माताजी का मंगल मिलन विशिष्टश्री मती माताजी से हुआ। बागीदौरा नगर से विहार कर नगर में माताजी का मंगल प्रवेश हुआ। नौगामा से पढ़िए, सुरेशचंद्र गांधी की रिपोर्ट…


नौगामा। नगर में आचार्य श्री विभव सागर जी महाराज की शिष्या आर्यिका सिद्धश्री मती माताजी का मंगल मिलन विशिष्टश्री मती माताजी से हुआ। बागीदौरा नगर से विहार कर नगर में माताजी का मंगल प्रवेश हुआ। माताजी ने कहा कि नौगामा के धर्म प्रेमी बंधु बड़े सौभाग्यशाली हैं। यहां के विशाल जैन मंदिर, विशाल प्रतिमा देखकर यह लगता है कि यह नगरी धर्म नगरी है। वागड़ के बड़े बाबा आदिनाथ, भगवान नेमिनाथ के दर्शन कर मन प्रफुल्लित हुआ। शनिवार को माताजी ने सुखोदय तीर्थ नसिया जी के दर्शन किए। माताजी ने कहा कि साधु संतों के लिए यह तीर्थ साधना का स्थल है। सम्मेद शिखर की सुंदर रचना की है। उन्होंने नव निर्माणाधीन भगवान मुनि सुव्रतनाथ जिनालय के लिए आशीर्वाद प्रदान किया। माताजी ने कहा कि शीघ्र भगवान की प्रतिमा विराजमान हो। ऐसी हमारी मनोकामनाएं हैं।

भक्ति भाव से गरबा नृत्य किया 

माताजी का पंडाल में आगमन हुआ, जहां पर माताजी के सानिध्य में श्रुतस्कन्ध विधान का आयोजन किया गया। माताजी के मुखारविंद से वाद्य यंत्रों के मधुर स्वरों के साथ विधान के अर्घ्य चढ़ाए गए। उपस्थित सभी धर्म प्रेमी बंधुओं ने बड़े भक्ति भाव से गरबा नृत्य करते हुए भक्ति प्रकट की। महिला केसरिया वस्त्रों तथा पुरुष सफेद वस्त्रों में उपस्थित रहे एवं माताजी ने सरस्वती मंत्र का उच्चारण कर बालकों को ज्ञानवर्धन की बात बताई। इस अवसर पर सांगानेर संस्थान से पधारे भैया जी एवं विधानाचार्य रमेशचंद्र गांधी ने कार्यक्रम का संचालन किया। आभार जैन समाज अध्यक्ष विपुल पंचोली ने माना।

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