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विपत्तियों के मध्य ही सफलता का असली आनंद : परिस्थितियाँ हमारे धैर्य, साहस और आत्मविश्वास की परीक्षा लेती हैं, 


जीवन में जब भी हम किसी नए कार्य की शुरुआत करते हैं, तो वह हमें बहुत सरल और सहज प्रतीत होता है। हमें लगता है कि बस कुछ प्रयासों के बाद हम अपने लक्ष्य तक पहुँच जाएंगे। किन्तु जैसे-जैसे हम उस मार्ग पर आगे बढ़ते हैं, हमें वास्तविकताओं का सामना करना पड़ता है। तब ज्ञात होता है कि सफलता का रास्ता उतना आसान नहीं है। मुरैना से पढ़िए, अंशुल शास्त्री का यह आलेख के रूप में मनोज जैन नायक की प्रस्तुति…


मुरैना/सांगानेर। जीवन में जब भी हम किसी नए कार्य की शुरुआत करते हैं, तो वह हमें बहुत सरल और सहज प्रतीत होता है। हमें लगता है कि बस कुछ प्रयासों के बाद हम अपने लक्ष्य तक पहुँच जाएंगे। किन्तु जैसे-जैसे हम उस मार्ग पर आगे बढ़ते हैं, हमें वास्तविकताओं का सामना करना पड़ता है। तब ज्ञात होता है कि सफलता का रास्ता उतना आसान नहीं है, जितना दूर से दिखाई देता था। ‎अक्सर ऐसा होता है कि जिस क्षेत्र में हम आगे बढ़ना चाहते हैं, उसी क्षेत्र के कुछ लोग हमारे उत्साह को कम करने का प्रयास करते हैं। कभी आलोचनाएँ सामने आती हैं, कभी उपेक्षा मिलती है, तो कभी अपने ही लोग निराश करने वाले शब्द बोल देते हैं। उस समय मन में अनेक प्रश्न उठते हैं कि आखिर हमारे साथ ऐसा क्यों हो रहा है। लेकिन वास्तव में यही परिस्थितियाँ हमारे धैर्य, साहस और आत्मविश्वास की परीक्षा ले रही होती हैं।

‎हर महान कार्य की नींव संघर्षों और विपत्तियों पर ही रखी जाती है। यदि मार्ग में कठिनाइयाँ न आएँ, तो सफलता का मूल्य भी समझ में नहीं आता। कई बार विपत्ति किसी विरोधी के रूप में नहीं, बल्कि अपने ही किसी प्रिय व्यक्ति के रूप में सामने आ जाती है। उसके शब्द और व्यवहार हमें पीड़ा पहुँचा सकते हैं, परन्तु ऐसे समय में हमें टूटना नहीं चाहिए। विपत्ति का कार्य हमें रोकना है और हमारा कार्य उससे आगे बढ़ जाना है।

‎लोग क्या कहेंगे, यह चिंता भी एक बड़ी विपत्ति है। संसार का स्वभाव ही है कहना। जब आप कुछ नहीं करते, तब भी लोग कहते हैं; और जब आप कुछ बड़ा करने का प्रयास करते हैं, तब भी लोग कहते हैं। इसलिए दूसरों की बातों से प्रभावित होकर अपने कदम रोक लेना बुद्धिमानी नहीं है। हमें अपने लक्ष्य पर दृष्टि रखनी चाहिए, न कि लोगों की टिप्पणियों पर।

‎याद रखिए, संघर्ष के दिनों में जो आँसू बहते हैं, वे ही भविष्य में सफलता की मुस्कान बनकर लौटते हैं। आज की कठिनाइयाँ कल की उपलब्धियों की कहानी बन जाती हैं। जब मनुष्य अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेता है, तब उसे रास्ते की परेशानियाँ याद नहीं रहतीं; उसे केवल अपनी सफलता और उससे मिली खुशी याद रहती है।

‎इसलिए विपत्तियों से घबराइए मत। उनका सामना कीजिए, उनसे सीखिए और निरंतर आगे बढ़ते रहिए। क्योंकि विपत्तियाँ सफलता की शत्रु नहीं, बल्कि सफलता तक पहुँचाने वाली सीढ़ियाँ हैं। और सच तो यह है कि विपत्तियों के बीच प्राप्त हुई सफलता का आनंद ही जीवन का सबसे बड़ा आनंद होता है।

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