“सबकी सेवा, सबको प्यार” और “जियो और जीने दो” के आदर्श वाक्यों को यदि कोई संस्था वास्तविक रूप में चरितार्थ करती है तो वह है महावीर इंटरनेशनल सिलीगुड़ी केंद्र द्वारा संचालित वृद्धाश्रम “अपना घर”। 76 कुष्ठ रोगियों की नि:स्वार्थ सेवा से प्रारंभ हुआ “अपना घर” सिलीगुड़ी की प्राकृतिक वादियों के मध्य 14 बीघा भूमि में स्थित-आश्रयस्थल है। बांसवाड़ा से अजित कोठिया की यह रिपोर्ट…
बांसवाड़ा। “सबकी सेवा, सबको प्यार” और “जियो और जीने दो” के आदर्श वाक्यों को यदि कोई संस्था वास्तविक रूप में चरितार्थ करती है तो वह है महावीर इंटरनेशनल सिलीगुड़ी केंद्र द्वारा संचालित वृद्धाश्रम “अपना घर”। 76 कुष्ठ रोगियों की नि:स्वार्थ सेवा से प्रारंभ हुआ “अपना घर” आज सिलीगुड़ी की प्राकृतिक एवं सुरम्य वादियों के मध्य 14 बीघा भूमि में स्थित एक ऐसा आश्रयस्थल बन चुका है। जहाँ प्रत्येक निराश्रित एवं जरूरतमंद व्यक्ति महावीर इंटरनेशनल की सेवाभावी भावना का आत्मीय स्पर्श अनुभव करता है। भोजनशाला, भजनशाला, चिकित्सालय, कॉन्फ्रेंस हॉल, गौशाला एवं अन्य सुविधाओं से सुसज्जित यह परिसर वास्तव में अपने नाम के अनुरूप सभी को अपनेपन का एहसास कराता है। यहाँ का प्रत्येक सदस्य अपने घर से भी अधिक आनंदित और संतुष्ट दिखाई देता है।
महावीर इंटरनेशनल के गवर्निंग काउंसिल सदस्य वीर विजय प्रकाश पीपाड़ा, विशेष आमंत्रित गवर्निंग काउंसिल सदस्य वीर राजेंद्र पोखरना, महावीर इंटरनेशनल के कन्वीनर राकेश चपलोत, दिनेश तातेड, महेंद्र तातेड, वर्धमान स्थानकवासी जैन समाज के अध्यक्ष पारस ओस्तवाल, महामंत्री प्रकाश पीपाड़ा, चंद्र प्रकाश तातेड, मुंबई के उद्यमी यशवंत पामेचा, दिनेश पीपाड़ा, वीरा रंजना तातेड, साधना पोखरना, किरण चपलोत, प्रेमलता पीपाड़ा, देवेंद्र ओस्तवाल, चंद्रकांता तातेड, भागवंती पीपाड़ा, हेमलता तातेड, शीला पीपाड़ा, निर्मला पामेचा एवं समूह की सबसे लाडली ज़िनिशा तातेड दार्जिलिंग, गंगटोक, गुवाहाटी एवं मेघालय की भ्रमण यात्रा पर थे। इसी दौरान सिलीगुड़ी स्थित “अपना घर” के दर्शन एवं सेवा कार्यों को देखने का कार्यक्रम बनाया गया। “अपना घर” पहुँचते ही समस्त वृद्ध माताओं एवं स्टाफ ने सभी अतिथियों का भावभीना स्वागत किया। अपने बीच आगंतुकों को पाकर वृद्धजनों की बूढ़ी आँखों में झलकती खुशी और आत्मीयता ने सभी को भावविभोर कर दिया। उनका स्नेह और अपनापन जीवन भर स्मरणीय रहने वाला अनुभव बन गया।
सभी का अभिवादन स्वीकार करने के पश्चात “अपना घर” को अपने घर से भी बढ़कर समर्पण भाव से संभालने वाले वीर रमेश वेद, सचिव अनिल अग्रवाल, महावीर सेवा संस्थान के मेघराज सेठिया तथा व्यवस्थापिका मधुमिता सहित समस्त सेवा दल का सम्मान किया गया। संस्था की निस्वार्थ सेवा, उत्कृष्ट व्यवस्थाओं एवं मानवता के प्रति समर्पण से अभिभूत होकर संपूर्ण यात्रा संघ ने 21,000 रुपए की सहयोग राशि “अपना घर” को भेंट की।
संपूर्ण आयोजन में वीर रमेश वेद एवं उनकी टीम की अद्भुत सेवाभावना, विनम्रता तथा “अपना घर” के प्रति उनका पूर्ण समर्पण देखकर सभी श्रद्धा और सम्मान से भर उठे। यह यात्रा केवल एक भ्रमण नहीं, बल्कि सेवा, करुणा और मानवता के साक्षात दर्शन का अनुपम अवसर बन गई। “सेवा ही सर्वोच्च धर्म है” और “अपना घर” इस धर्म का एक प्रेरणादायी एवं जीवंत उदाहरण है।













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