धर्म संवर्धन संस्कृति शिविर में सभी उम्र के भक्तों द्वारा भाग लेना धर्म के प्रति रुझान दर्शाता है।धार्मिक शिविर में धर्म का कैसे संवर्धन हो,संस्कृति और संस्कार कैसे प्राप्त हो इसका उपदेश साधु परमेष्ठि द्वारा आपको दिया गया। सभी ने धर्म की शिक्षा जीवन में ग्रहण करने की प्रेरणा प्राप्त की। यह धर्म देशना आचार्यश्री वर्धमान सागर जी ने धर्म संवर्धन ,संस्कृति शिविर के समापन में दी। जयपुर से पढ़िए, यह खबर…
जयपुर। धर्म संवर्धन संस्कृति शिविर में सभी उम्र के भक्तों द्वारा भाग लेना धर्म के प्रति रुझान दर्शाता है।धार्मिक शिविर में धर्म का कैसे संवर्धन हो,संस्कृति और संस्कार कैसे प्राप्त हो इसका उपदेश साधु परमेष्ठि द्वारा आपको दिया गया। सभी ने धर्म की शिक्षा जीवन में ग्रहण करने की प्रेरणा प्राप्त की। यह धर्म देशना आचार्यश्री वर्धमान सागर जी ने धर्म संवर्धन ,संस्कृति शिविर के समापन में दी। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से श्रीजी के दर्शन, अभिषेक ,पूजन, स्वाध्याय ,तप उपवास की प्रक्रिया सरल भाषा में आपको बताई गई शिक्षा के माध्यम से आधुनिक उपकरणों से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे थे। गणिनी आर्यिका श्री सुपार्श्व मति जी की प्रेरणा से पूर्व गृहस्थ अवस्था के परिजनों द्वारा सुंदर क्षेत्र निर्मित कराया गया है। परिजनों द्वारा आयोजित धार्मिक शिविर से सबके जीवन में उन्नति हो ऐसी मंगल भावना आशीर्वाद देते हैं। डॉ. राजेश पंचोलिया एवं सुनीता, भागचंद चूड़ीवाल के अनुसार आचार्य श्री के उपदेश के पूर्व मुनि श्री हितेंद्र सागर जी महाराज ने अपने उद्बोधन में बताया कि संघ के साधुओं द्वारा धार्मिक विषयों पर शिक्षण दिया गया। सभी विषयों के सफल प्रतिभागियों के नाम की घोषणा की। उन्हें पुण्यार्जक चुड़ीवाल परिवार द्वारा पुरस्कृत किया गया । उल्लेखनीय हैं कि जैन धर्म के शिविर में ब्राह्मण समाज के डॉ. राहुल गौर उप प्राचार्य केंद्रीय विद्यालय गुजरात ने तत्वार्थ सूत्र जैसे सार गर्भित कठिन विषय में भाग लेकर पुरस्कृत हुए।













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