गणिनी आर्यिका श्री सुपार्श्वमति जी की समाधि स्थली श्री चन्द्रप्रभ जिनालय में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी चंद्रप्रभ जिनालय में 36 साधु सहित ग्रीष्मकालीन वाचना...
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धर्म संवर्धन संस्कृति शिविर में सभी उम्र के भक्तों द्वारा भाग लेना धर्म के प्रति रुझान दर्शाता है।धार्मिक शिविर में धर्म का कैसे संवर्धन हो,संस्कृति और संस्कार...
दीक्षा का अर्थ है, इच्छाओं का दमन दीक्षा याने लंच और मंच का बदल जाना। दीक्षा मतलब ड्रेस और एड्रेस का परिवर्तन हो जाना। विचारों में क्रांति को दीक्षा कहते हैं...
जबलपुर दिगंबर जैन समाज का भारत वर्षीय जैन समाज के लिए ऐतिहासिक समाजिक निर्णय धर्म संस्कृति की सुरक्षा के लिए अनेक निर्णय समाज हित में लिए गए। इंदौर से पढ़िए, यह...
अनंतानंत भव्य आत्माये इस मार्ग पर चलकर सिद्ध हुए हैं। प्रथमाचार्य श्री शांतिसागरजी ने भी समीचीन धर्म मार्ग हमें बतलाया है। 20वीं सदी में अनेक दिगंबर साधुओं ने...
भगवान को पूजना सरल है किंतु भगवान की मानना कठिन है। यह उदगार बड़वानी नगर में विराजित विराग सागर जी महाराज के शिष्य आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महा मुनिराज के...
पंच कल्याणक प्रतिष्ठा सामान्य कार्यक्रम नहीं होकर महा महोत्सव होता है। जिसमें नर को नारायण, पाषाण को भगवान बनाया जाता है। पंचकल्याणक कार्यक्रम से संस्कार...
दिगंबर जैन साधु का संयम उपकरण पिच्छी और कमंडल है। यह जिन मुद्रा एवं करुणा का प्रतीक है। पिच्छी और कमंडल साधु के स्वालंबन के दो हाथ हैं। इनके बिना अहिंसा मय...
आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी ने कहा कि संयम, त्याग, संन्यास के मार्ग पर चलना है, तो राग और द्वेष को छोड़ना चाहिए। यदि आप अपनों से भी राग करोगे और दूसरों से द्वेष...








