श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर एवं अखिल भारतीय श्रमण संस्कृति महिला महासमिति (भारत ) द्वारा जैन मंदिरों में किए जाने वाले श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविरों का समापन हर्ष और गौरव का विषय है। जयपुर से पढ़िए, यह खबर…
जयपुर। श्री दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति संस्थान सांगानेर एवं अखिल भारतीय श्रमण संस्कृति महिला महासमिति (भारत ) द्वारा जैन मंदिरों में किए जाने वाले श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविरों का समापन हर्ष और गौरव का विषय है। संत सुधासागर बालिका महाविद्यालय और छात्रावास की अधिष्ठात्री व्रती श्राविका शीला जैन ड्योडा ने राधा निकुंज मंदिर में कहा कि विदुषी बहनों, स्थानीय शिक्षकों तथा विद्वानों के प्रेरणादायी अध्यापन और शिविरार्थियों के उत्साहपूर्ण सहभाग ने इस आयोजन को विशेष बना दिया। मंदिरों के अध्यक्ष मंत्री तथा संयोजकों की अथक मेहनत, समर्पण और सुव्यवस्थित प्रयासों से हजारों लोगों को संस्कार, ज्ञान और प्रेरणा का अमूल्य लाभ प्राप्त हुआ।
ऐसे प्रयास युवा पीढ़ी को उज्ज्वल संस्कार प्रदान करते हैं
संस्थान के कार्याध्यक्ष प्रमोद पहाड़िया ने कहा कि यह शिविर केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि समाज में नैतिकता, संस्कृति और मानवता के जागरण का माध्यम बना है। ऐसे पुण्य प्रयास समाज को नई दिशा और युवा पीढ़ी को उज्ज्वल संस्कार प्रदान करते हैं। हम सभी इस दिव्य कार्य से जुड़े प्रत्येक सहयोगी के प्रति हृदय से कृतज्ञता एवं अभिनंदन व्यक्त करते हैं। सहयोगी संस्था श्री दिगंबर जैन महिला समिति राजस्थान अंचल की अध्यक्ष शालिनी बाकलीवाल और निदेशिका डॉ. वंदना जैन ने शिविर में आचार्य विद्यासागर जी द्वारा रचित हाइकू पर चित्रांकन तथा कौन बनेगा धर्म शिरोमणि कार्यक्रम को मिली सफलता पर समाज को बधाई दी।
लघु नाटिकाओं में बालकों ने पात्रानुसार चारित्र झलकाया
जयपुर शिविर प्रभारी विनीता जैन ने बताया कि पाश्चात् संस्कृति में जैनी की दिनचर्या विषय पर भाषण तथा आध्यात्मिक भजन गायन में बालकों व युवाओं की बड़ी सहभागिता रही। इधर, प्रभारी दीपिका बिलाला, चंदा सेठी और अंजना जैन ने बताया कि चार गति विषय पर प्राप्त लघु नाटिकाओं में बालकों ने पात्रानुसार चारित्र झलकाया है। जनकपुरी में वरिष्ठ पत्रकार वीबी जैन जलते दीप ने शिविर की सराहना की। प्रचार-प्रसार प्रभारी पदम जैन बिलाला के अनुसार बुधवार को शाम को सभी विषय की सभी शिविर स्थलों पर परीक्षाएं हो गई हैं। इस एग्जाम में प्रत्येक मंदिर से प्रथम द्वितीय तथा तृतीय आने वाले को संस्थान द्वारा पुरस्कृत किया जाएगा तथा प्रथम स्थान पाने वाला रत्नाकर अवार्ड के लिए तीस मई को होने वाली परीक्षा के लिए पात्र होगा।
शिविर का समापन समारोह रविवार को
संस्थान के अध्यक्ष एसके जैन और मानद मंत्री सुरेश कासलीवाल ने बताया कि श्रमण संस्कृति संस्कार शिक्षण शिविर का समापन समारोह रविवार 31 मई की शाम विद्या सुधा सभागार सांगानेर संस्थान में होगा। जहां 63 में से तीन बेस्ट मंदिरों का चयन कर पुरस्कृत किया जाएगा। समारोह में शिविरार्थियों के अलावा समाज के प्रमुख गणमान्य श्रृष्ठियों की उपस्थिति रहेगी।













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