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णमोकार मंत्र में पांच परमेष्ठि को है नमन: आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सानिध्य में हुआ सामूहिक जाप, श्रद्धालुओं ने किया पुण्यार्जन 


महावीर जैन शिक्षा परिषद के तत्वावधान में श्री महावीर स्कूल सी स्कीम में सामूहिक णमोकार मंत्र के पाठ के लिए आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज संघ सहित पधारे। इस अवसर पर आचार्य श्री ने उपदेश में बताया कि णमोकार मंत्र में पांच परमेष्ठि को नमन किया जाता है। जयपुर से पढ़िए, राजेश पंचोलिया की यह खबर…


जयपुर। महावीर जैन शिक्षा परिषद के तत्वावधान में श्री महावीर स्कूल सी स्कीम में सामूहिक णमोकार मंत्र के पाठ के लिए आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज संघ सहित पधारे। इस अवसर पर आचार्य श्री ने उपदेश में बताया कि णमोकार मंत्र में पांच परमेष्ठि को नमन किया जाता है। अरिहंत, सिद्ध ,आचार्य ,उपाध्याय और सर्व साधु इन परम पद को पाने के लिए आपको धर्म की राह पर चलकर भावना बनाकर जीवन को त्याग की ओर करने का पुरुषार्थ करना होगा। आचार्य श्री ने कहा कि विश्व के भीतर अनेक पद है, उन पदों के लिए होड़ लगती है। लौकिक शिक्षा में भी उच्च पद आर्थिक लक्ष्य को रखकर शिक्षा प्राप्त की जाती है। जीवन को संस्कारित बनाकर स्वयं के लिए, परिवार, समाज, राष्ट्र हित की भावना जागृत होना चाहिए। उमरावमल संघी, सुनील बक्शी ,महेश काला, राजेश सेठी ने बताया कि आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने णमोकार मंत्र को अनादि निधन मंत्र बताया। जब से सूर्य ,चंद्रमा, हवा, अग्नि ,वृक्ष ,सृष्टि निर्मित है तब से यह मंत्र अनादि निधन है। स्वयं से होने के कारण यह शाश्वत और अनिष्ट है। जीवन में सभी का लक्ष्य सकारात्मक होकर जीवन का नवनीत प्राप्त करने का लक्ष्य होना चाहिए।

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