जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के प्रथम पारणा दिवस अक्षय तृतीया पर श्री दिगंबर जैन वीर मंडल द्वारा एटा के आठ मंदिरों में इक्षु रस (गन्ने के रस) का वितरण किया गया। एटा से पढ़िए, सोनल जैन की यह रिपोर्ट…
एटा। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के प्रथम पारणा दिवस अक्षय तृतीया पर श्री दिगंबर जैन वीर मंडल द्वारा एटा के आठ मंदिरों में इक्षु रस (गन्ने के रस) का वितरण किया गया। पुरानी बस्ती स्थित श्री दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, श्री नेमीनाथ जिनालय, नसिया जी मंदिर, जानकीदास चैत्यालय, महावीर मोरध्वज मंदिर, श्री शीतलनाथ मंदिर, श्री आदिनाथ चैत्यालय बांस मंडी एवं कासगंज रोड स्थित वीर विमल अहिंसा क्षेत्र में संस्था द्वारा जैन धर्म में दान की अक्षुण्ण परंपरा के निर्वहन के लिए भक्तों ने इक्षु रस का वितरण कर पुण्यार्जन किया। वीर मंडल के संरक्षक सुनील बांदा ने बताया कि यह महान पर्व तीर्थंकर भगवान आदिनाथ के कठिन तप और युग के पहले दान की गौरव गाथा है। प्रयाग में दीक्षा के छः महीने अखंड उपवास के पश्चात जब मुनि श्री आहार के लिए निकले तो एक विकट स्थिति उत्पन्न हुई उस समय प्रजा नवधाभक्ति से अनभिज्ञ थी। इस अज्ञानता के कारण मुनि श्री का उपवास अंतराल बढ़कर एक वर्ष एक माह नौ दिन का हो गया। वीर मंडल के अध्यक्ष गौरव जैन ने बताया कि मुनि श्री विहार करते हुए हस्तिनापुर नगरी पहुंचे जहां के राजा श्रेयांश को अपने पूर्व भव के आहार दान विधि का स्मरण हुआ और उन्होंने वैशाख शुक्ल तृतीया को विधि विधान पूर्वक गन्ने के रस का प्रथम आहार मुनि श्री को प्रदान कर अक्षय पुण्य प्राप्त किया। इस लिए इस तिथि का नाम अक्षय तृतीया पड़ा ,और दान तीर्थ का प्रवर्तन हुआ,इस दिन जैन समाज द्वारा आहार दान के साथ ही यथा शक्ति औषधि दान, ज्ञान दान, अभयदान (जीवों की रक्षा) के विशेष उपक्रम चलाये जाते हैं।
इन्होंने किया पुण्यार्जन
इस अवसर पर योगेश जैन, शैलेंद्र जैन, अकलंक जैन, सुन्नेश जैन, राजू जैन, मनोज जैन, राहुल जैन, विपिन स्वामी, सतेन्द्र जैन,संजय जैन, प्रियांशु जैन, अतुल जैन,राज जैन, सक्षम जैन,राजकुमार जैन, अनमोल जैन,जौनी जैन, नैतिक जैन,आशु जैन,हर्ष जैन, नवनीत जैन, पंकज जैन,अन्नू जैन,अमित जैन, अनुराग जैन,दीपू जैन,पवन बल्ले, विक्की जैन, रश्मि जैन, राजकुमारी जैन,रानी जैन ,विनीता जैन,सपना जैन, अंजना जैन,उषा जैन,श्रुति जैन रुचि जैन,मधू जैन, उर्मिल जैन, एवं रितु जैन आदि ने उपस्थित रहकर पुण्यार्जन किया।













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