धर्मायतनों व समाजहितों के संरक्षण, संवर्धन हेतु सागर में जैन समाज का प्रदेश स्तरीय सम्मेलन का आयोजन 12 अक्टूबर को होने जा रहा है । सम्मेलन में सहयोग हेतु...
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धर्म वह नहीं है जो पर वस्तु को ग्रहण करने की बात करें, जब व्यक्ति के मन में एक अनुभूति जागती है कि मैं अपने आप में पूर्ण हूं जो हमारा है वही हमारा है। एक धर्म...
क्रोध प्रायः चेतन पदार्थ से जागता है, मायाचारी व्यक्ति भी जीव को फंसाता है, मान भी अकड़ता है तो जीव के सामने अकड़ता है, इन तीनो कषायों में जीव की प्रधानता है...
धर्मात्मा की पहचान है क्रिया, कुछ न कुछ करता हुआ पाया जाएगा। धर्म हमें सक्रिय करता है। 24 घण्टे में तुम कोई क्रिया करो, तुम्हारी हर प्रवृत्ति में धर्म की...
त्योहार धर्मात्मा बनाता है और पर्व धर्म बनाता है। कितने त्योहार होते हैं वह किसी न किसी धर्मात्मा से जुड़े होते हैं, व्यक्तिगत होते हैं। जब- जब धर्मात्मा किसी...
कुछ वस्तुएं ऐसी होती हैं जो स्वयं के कल्याण के साथ-साथ जगत के कल्याण के लिए भी शगुन जाती है, कल्याण तो उपदान से होता है लेकिन निमित्त कभी कभी किसी कल्याण का...
व्यवहार सत्य स्वरूपी होता है और निश्चय उस शक्ति को बताता है, शक्ति में कभी आनंद नही है, शक्ति में एक अहंकार आता है। जब जब किसी को शक्ति का भान होता है, उसका...
हम पुण्यात्मा हैं हम शक्तिमान हैं, हम साधु हैं, हम भगवान हैं, जितना अपने आप को ऊंचा उठा सको उठाओ क्योंकि हमने आपसे कहा था कि तुम अपने आप को जितना नीचे गिरा...
यदि आपको कभी ऐसी अनुभूति हो कि पुण्यहीन हूं, मेरे से आगे कोई है, जब तुम्हें छोटेपन की अनुभूति हो कि मैं किसी से छोटा हूं, गरीब हूं, मैं बुद्धिहीन हूं, मेरी...
धन तो सब चाह रहे हैं लेकिन तरीके इतने भिन्न हैं कि एक धन कमाकर सेठ बन जाता है और एक धन कमाकर डाकू बन जाता है। दोनों की दृष्टि धन पर है लेकिन वह धन से प्रभावित...








