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धर्मसभा में दिए प्रवचन : झूठ बोलने की अपेक्षा, सत्य का न बोलना श्रेष्ठ है – मुनि श्री सुधासागर जी महाराज

व्यवहार सत्य स्वरूपी होता है और निश्चय उस शक्ति को बताता है, शक्ति में कभी आनंद नही है, शक्ति में एक अहंकार आता है। जब जब किसी को शक्ति का भान होता है, उसका...

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धर्मसभा में दिए प्रवचन : गुणहीन व्यक्ति यदि गुणवानों से प्रशंसा सुनकर आनंदित होता है तो वह लूला लंगड़ा, अंधा और बहरा होता है – मुनि श्री सुधासागर जी महाराज

 हम पुण्यात्मा हैं हम शक्तिमान हैं, हम साधु हैं, हम भगवान हैं, जितना अपने आप को ऊंचा उठा सको उठाओ क्योंकि हमने आपसे कहा था कि तुम अपने आप को जितना नीचे गिरा...

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धर्मसभा में दिए प्रवचन : आत्महत्या से बड़ा कोई पाप नहीं हो सकता- मुनि श्री सुधासागर महाराज

यदि आपको कभी ऐसी अनुभूति हो कि पुण्यहीन हूं, मेरे से आगे कोई है, जब तुम्हें छोटेपन की अनुभूति हो कि मैं किसी से छोटा हूं, गरीब हूं, मैं बुद्धिहीन हूं, मेरी...

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धर्मसभा में दिए प्रवचन : परिवार मेरे साथ नहीं रहता है, मैं परिवार के साथ रहता हूं – मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज

धन तो सब चाह रहे हैं लेकिन तरीके इतने भिन्न हैं कि एक धन कमाकर सेठ बन जाता है और एक धन कमाकर डाकू बन जाता है। दोनों की दृष्टि धन पर है लेकिन वह धन से प्रभावित...

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धर्मसभा में दिए प्रवचन : बड़ा आदमी वह है जो छोटों को गले लगाता है – मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज

सम्यकचारित्र को प्राप्त करना कठिन नहीं है यदि सम्यकज्ञान हो जाये तो। यदि ज्ञान तुम्हारा समीचीन है तो चारित्र भी कोई दूर नहीं है और सम्यक्दर्शन यदि तुम्हें हो...

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धर्मसभा में दिए प्रवचन : सहायता उनकी करो जिसका कोई सहारा नहीं : मुनि श्री सुधासागर जी महाराज

हम अपने आप को सबसे छोटा, सबसे बड़ा मूर्ख समझें, अज्ञानी होकर नही, ज्ञानी होकर। दूसरा व्यक्ति हमें मूर्ख कहे उसके पहले कहना मैं तो मूर्ख हूं ही, कौन सा बुरा बोल...

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धर्मसभा में दिए प्रवचन : बड़े लोग जब प्रशंसा करें तो समझना ये आग है : निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज

हम अच्छाई को समझें या ना समझें, हमें बुराई का ज्ञान होना चाहिए। हम कितने ही गुण लेकर बैठे रहें, एक अवगुण सारे गुणों को गन्दा कर देता है। हजार खुशियां जिंदगी भर...

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धर्म सभा में दिए प्रवचन : कर्म जो कराएगा वह करूंगा नहीं, मैं जो करूंगा उसे कर्म को करना पड़ेगा – मुनि श्री सुधासागर जी महाराज

जो जहां है वहां से आगे बढ़ने का भाव आए तो ये तीन बातें ध्यान रखना- कभी भी अपनी जिंदगी किस्मत के भरोसे मत छोड़ना। किसी भी कार्य को शुरू करने के पहले यह भाव मत...

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धर्म सभा में दिए प्रवचन : मां बाप जिंदा है और तू उनके बिना जीना चाहता है, इसी का नाम पशु है – निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज

 निर्यापक मुनिपुंगव श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि देवों में कोई व्यसन नहीं होता इसलिए वह करते नहीं, मोक्ष का दरवाजा बन्द है क्योंकि तुम्हें मिला...

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धर्मसभा में दिए प्रवचन : मांसाहारी का फिर भी उद्धार हो सकता है लेकिन कुल कलंकी का कभी उद्धार नहीं हो सकता : मुनि श्री सुधासागर जी महाराज

हम कुछ पाने की इच्छा में जो हमारे पास है, उसको खो बैठते हैं, इसे कहते हैं ओवर कॉन्फिडेंस। जब किसी को भावी पर्याय का कुछ आश्वासन मिल जाए तो वह वर्तमान पर्याय को...

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