समाचार

संजय भैया जी दोसी बने मुनि श्री सामायिक सागरजी : क्षुल्लक अर्घ्य सागरजी बने मुनि श्री अर्घ्यसागरजी महाराज


37 बरस के लंबे इंतजार के बाद रविवार को परतापुर नगरी का सौभाग्य पुनः जगा, जब आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज के मांगलिक सान्निध्य में नगर में एक साथ पांच दीक्षाए संपन्न हुई। परतापुर से पढ़िए, अजीत कोठिया की रिपोर्ट…


परतापुर। 37 बरस के लंबे इंतजार के बाद रविवार को परतापुर नगरी का सौभाग्य पुनः जगा, जब आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज के मांगलिक सान्निध्य में नगर में एक साथ पांच दीक्षाए संपन्न हुई। सुबह 7 बजे ही परतापुर का सुभाष स्टेडियम श्रद्धालुओं से खचाखच भर गया था और इसके बाद गांव गांव से अपार जन सैलाब उमड़ घुमड़ कर आ ही रहा था। क्या जैन, क्या अजैन हर पंथ, जाति, संप्रदाय और समाज में धार्मिक श्रद्धा का मानो ज्वार ही उमड़ पड़ा था। 37 वर्ष पूर्व की महावीर जयंती 18 अप्रैल 1989 की यादें ताज़ा हो गई, जब आचार्य श्री पुष्पदंत सागर जी महाराज, आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी सहित इसी स्थान पर इसी नगरी में एक साथ पांच दीक्षाए दी थी।

ब्रह्मचारी सेवानिवृत वीआरएस शिक्षक, गुरुभक्त संजय भैया दोसी ने गुरुदेव द्वारा मंत्रोच्चार से दीक्षित होकर जब अपने वस्त्र उतार फेंके तो पंडाल में अपार जन समूह जय जय कार कर उठा। ये त्याग, भक्ति, वैराग्य ओर तप साधना की पराकाष्ठा थी। ब्रह्म मुहूर्त में आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी ने संजय भैया दोसी का केशलोंचन किया। शोभा यात्रा वैराग्य भावो के साथ खेल मैदान पहुंची, समाज और परिजनों की परमिशन के साथ ही संजय दोसी भैयाजी मुनि श्री सामायिक सागर जी महाराज बन गए। वास्तव में जैन दर्शन पाषाण को परमात्मा ओर आत्मा को भगवान बनाने की कला है। यहां कोई भी व्यक्ति परमात्मा बनने के पथ पर अग्रसर हो सकता है। आयोजन के दौरान कई भावुक पल भी आए पर किसी भी दीक्षार्थी के कदम एक क्षण को भी नहीं डगमगाए।

सभी दीक्षार्थियों ने भी अपनी भावांजलि अर्पित की

संघस्थ क्षुल्लक अर्घ्य सागरजी ने आज मुनि दीक्षा ग्रहण कर मुनि श्री अर्घ्य सागरजी महाराज नाम धारण किया। क्षुल्लिका धर्म प्रभा माताजी आर्यिका श्री धर्म प्रभा माताजी बनी। इसी क्रम में परतापुर की संघस्थ आर्यिका ज्ञानप्रभा माताजी को आज गणिनी ज्ञान प्रभा माताजी के रूप में प्रतिष्ठापित किया गया। परतापुर से गणिनी माताजी का दर्जा पाने वाली वो प्रथम आर्यिका बन गई है। आज कनक दीदी ने क्षुल्लिका दीक्षा ग्रहण कर 105श्रीद्रव्यप्रभा माताजी बनी। परतापुर के पचौरी परिवार की बड़ी बहु ओर 1989में आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज की मुनि दीक्षा के दौरान उनकी धर्म माता बनी सुशीला देवी को आज गुरुदेव ने क्षुल्लिका दीक्षा प्रदान कर श्री भाव प्रभा माताजी नाम दिया। सुबह 7बजे से प्रारंभ भव्य ऐतिहासिक दीक्षा महोत्सव सुबह 11.50 तक चला। सभा को आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी ने संबोधित किया, सभी दीक्षार्थियों ने भी अपनी भावांजलि अर्पित की। ब्र. अरुण भैया के शानदार संयोजन ने आयोजन में चार चांद लगा दिए।

आप को यह कंटेंट कैसा लगा अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे।
+1
0
+1
0
+1
0
Shree Phal News

You cannot copy content of this page