मित्रता केवल सामाजिक संबंध नहीं, बल्कि जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। सच्चा मित्र वही है जो विपरीत परिस्थितियों में साथ खड़ा रहे, गलत राह पर जाने से रोके और...
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धरियावद स्थित श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में पर्यूषण पर्व के तीसरे दिन क्षुल्लक 105 श्री महोदय सागर जी महाराज ने श्रद्धालुओं को अहंकार और वहम से दूर रहने...
पट्टाचार्य श्री 108 विशुद्ध सागर जी महाराज ने प्रवचन में कहा कि अहंकार विष के समान है, जो आत्मा को भीतर से खोखला कर देता है, जबकि मार्दव धर्म अमृत स्वरूप है...
रामगंजमंडी में आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर महाराज ने धर्मसभा में प्रवचन देते हुए कहा कि मायाचारी तिर्यंच गति का कारण बनती है। मन में कुछ और वचन में कुछ कहना...








