Tag - राजस्थान के जैन संत

राजस्थान के संत समाचार

राजस्थान के जैन संत 14 ब्रह्म श्री जयसागर जी ने गुरु वंदना को साहित्य का आधार बनाया: राजस्थान के जैन संतों में है अनुपम स्थान

राजस्थान के जैन संतों की श्रंखला में अनेकोनेक संत हुए, लेकिन अपने गुरु के प्रति निष्ठावान शिष्य बिरले ही नजर आए। जिन्होंने जन साधारण के लिए साहित्य तो...

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राजस्थान के जैन संत 13 भट्टारक श्री अभयचंद्र आध्यात्मिक जादूगर बन गए: काव्य वैभव और सौष्ठव प्रयुक्त होने की अपेक्षा प्रचार का लक्ष्य अधिक था

राजस्थान के जैन संतों ने जहां अपनी साधुता से जन-जन में आध्यात्मिक चेतना से जनजागरण किया। वहीं उनकी साहित्य साधना ने हिन्दी साहित्य को उस समय खूब समृद्ध किया।...

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राजस्थान के जैन संत 12 बारडोली के संत श्री कुमुदचंद्र जी का साहित्य को अमूल्य योगदान: उनकी गुजरात और राजस्थान में अच्छी प्रतिष्ठा थी

राजस्थान को जैन संतों की भूमि के रूप में ख्याति अर्जित है। प्राचीन काल में भी यहां कई दिव्य संतों का जन्म और भ्रमण हुआ है। संत श्री कुमुदचंद्र जी ऐसे ही संत...

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राजस्थान के जैन संत 11 आध्यात्म और भक्तिपरक पदों के रचियता भट्टारक श्री रत्नकीर्ति जी: रचनाएं भाषा, भाव और शैली सभी दृष्टियों से श्रेष्ठ

राजस्थान के जैन संतों ने जहां अपनी साधना से जनमानस को धर्म और आध्यात्म की ओर प्रेरित किया। वहीं मुनियों, साधुओं ने हिन्दी साहित्य में काव्य और भक्ति पदों के...

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राजस्थान के जैन संत 10  संतश्री सुमतिकीर्ति जी ने केवल साहित्य साधना से ही जैन समाज को किया जाग्रतः हिन्दी, संस्कृत, प्राकृत और राजस्थानी के थे प्रकांड विद्वान

जैन धर्म में राजस्थान में संतों और साधुओं ने जहां अपनी तप और साधना के बल पर जन जागृति का अलख जगाया तो कुछ संत ऐसे भी हैं जिन्होंने केवल अपने साहित्य साधना से...

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राजस्थान के जैन संत 9 साधु जीवन को पूरी तरह निभाते और गृहस्थों को संयमित जीवन का उपदेश देते - भट्टारक श्रीवीरचंदः राजस्थान, गुजरात सहित कई प्रांतों में फैली थी कीर्ति

जैन दर्शन, धर्म और संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने और इस संप्रदाय की नींव को मजबूत बनाने के लिए राजस्थान की धरती पर जैन संतों ने जन्म लेकर राजस्थान ही नहीं...

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राजस्थान के जैन संत 8 जैन श्रावकों को सत्य, अहिंसा के साथ सधार्मिक होने का अवसर किया प्रदान - भट्टारक श्री शुभचंद : अपनी प्रतिष्ठा एवं पद का खूब अच्छी तरह से किया सदुपयोग

राजस्थान में जन्मे संत, साधु और मुनियों में से अधिकांश साहित्य प्रेमी, धर्म प्रचारक और शास्त्रों के प्रखर ज्ञाता रहे हैं। इसी के चलते यहां की पुण्य धरती ने...

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राजस्थान के जैन संत 7 महाव्रती संतश्री यशोधरजी ने पांच व्रतों को जीवन में उतार दिया : भगवान नेमिनाथ का गीतों में किया गान, राजस्थान की धरती को बनाया महान

जगत के कल्याण के लिए, जैन धर्म की प्रभावना को जन-जन तक पहुंचाने के लिए राजस्थान के जैन संतों ने अपने प्रवचनों से तो जन जागरण किया ही अपनी प्रखर लेखनी से भी...

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राजस्थान के जैन संत 6 शील, सदाचार, सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र, वैराग्य और तप की बताई महत्ता - आचार्य श्री ब्रहम बूचराज जी नेः साहित्य और काव्य के माध्यम से तप, साधना और संयम का दिया संदेश

राजस्थान की धरती पर संतों ने जन्म लेकर केवल इसी धरती पर नहीं वरन कई-कई प्रांतों में विहार कर आध्यात्मिक चेतना, जीव और भगवान के बीच के संबंध को जानने का धर्म...

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राजस्थान के जैन संत 5 कठोर साधना से पूरे राष्ट्र में श्री विजयकीर्ति की आध्यात्मिक पताका फहराई : सांस्कृतिक कार्यक्रमों के संपादन में भी इनकी भूमिका रही उल्लेखनीय

दिगंबर जैन संतों के दिव्य वचन जैन समाज की आध्यात्मिक चेतना को प्रकाशमान करते हैं। जैन धर्म को सुदृढ़ता के साथ अपनी तपोपासना के माध्यम से दिव्य मार्ग भी बताते...

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