Tag - भारतीय संस्कृति

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"जय जिनेन्द्र" केवल अभिवादन नहीं, आत्मविजय का संदेश है : भारतीय संस्कृति और संस्कारों का प्रथम परिचय है हमारा अभिवादन

अभिवादन केवल औपचारिक शब्द नहीं, बल्कि व्यक्ति के संस्कार, संस्कृति और आध्यात्मिक दृष्टि का परिचय है। भारतीय परंपरा में “जय जिनेन्द्र”...

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योग : जीवन का संतुलन, आत्मा से आत्मा का संवाद : अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर भारतीय ज्ञान और अध्यात्म की वैश्विक गूंज

योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के समन्वय की जीवन-पद्धति है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस भारत की उस महान आध्यात्मिक विरासत का उत्सव है...

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भारतीय ज्ञान परंपरा के उत्कर्ष में जैन दर्शन, साहित्य और संस्कृति की अमिट भूमिका : अहिंसा, अनेकांत और ज्ञान की धारा ने समृद्ध किया भारतीय चिंतन

भारतीय ज्ञान परंपरा के विकास में जैन दर्शन, साहित्य और संस्कृति का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। प्राकृत भाषा, आगम साहित्य और जैनाचार्यों के वाङ्मय ने...

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संगम में बिखरे भारत की संस्कृति के रंग, यूनिक परिवार ने किया विविधता का भव्य उत्सव: दुर्गा पूजा, पोंगल, बैशाखी और नवरात्रि की मनमोहक प्रस्तुतियों ने जीता सभी का दिल, टीम वाइब्रेंट वेस्ट बनी विजेता

 जैन सोशल ग्रुप (जेएसजी) यूनिक द्वारा आयोजित “संगम – भारत के रंग, यूनिक के संग” कार्यक्रम में देश की विविध संस्कृति, परंपरा और त्योहारों का आकर्षक...

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पेड़-पौधों का वास्तु के अनुसार सही स्थान : वास्तु का वास्तविक उद्देश्य अंधविश्वास नहीं

भारतीय संस्कृति में वृक्षों को केवल पौधा नहीं, बल्कि जीवनदाता और देवतुल्य माना गया है। हमारे शास्त्रों में वृक्षों का महत्व बताते हुए कहा गया है। पेड़ों और...

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पर्यावरण संरक्षण: प्रकृति और मानव का अटूट संबंध :  पर्यावरण हमारे अस्तित्व का आधार

शुक्रवार को पूरे विश्व में पर्यावरण दिवस मनाया जाएगा। धरती की सुरक्षा के लिए पर्यावरण की रक्षा करना सभी देशवासियों का कर्तव्य है। जल, वायु के साथ-साथ मानव और...

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नवागढ़ में प्राकृत प्रशिक्षण कार्यशाला ने रचा इतिहास : भारतीय संस्कृति और प्राचीन भाषाओं के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

नकटवर्ती जैन तीर्थ नवागढ़ में आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज के आशीर्वाद से प्राकृत भाषा विकास फाउंडेशन की ओर से 12 से 14 अप्रैल तक आयोजित त्रिदिवसीय प्राकृत...

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भारतीय संस्कृति में चैत्र शुक्ल एकम गुड़ी पड़वा से नूतन वर्ष होता है शुरू : आचार्य श्री वर्धमान सागर जी कर चूलगिरी पर्वत पर पहुंचे

सभी संसारी प्राणी न्यू ईयर मनाने के लिए देर रात्रि को वर्ष के अंतिम दिवस होटल में, पिकनिक स्पॉट, हिल स्टेशन, महानगर जाते हैं किंतु साधु संत वर्ष के अंत के दिवस...

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संस्कार और समग्र शिक्षा का केंद्र बना श्री विद्यासागर गुरुकुलम : भोपाल में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष जोर

आधुनिक शिक्षा और भारतीय संस्कृति के समन्वय का अद्भुत उदाहरण बनकर उभर रहा श्री विद्यासागर गुरुकुलम् एक बार फिर प्रवेश सत्र 2025-26 को लेकर चर्चा में है। कक्षा 5...

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