नौगामा नगर के आदिनाथ जैन मंदिर में अष्टान्हिका महापर्व के अवसर पर भव्य एवं संगीतमय श्री नंदीश्वर महामंडल विधान तथा सिद्धचक्र विधान का शुभारंभ हुआ। 21 से 29 जुलाई तक प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, पूजन एवं विधान आयोजित किए जाएंगे। पढ़िए श्रीफल साथी सुरेश चंद्र गांधी की यह रिपोर्ट।
नौगामा नगर। अष्टान्हिका महापर्व के पावन अवसर पर नौगामा नगर स्थित श्री आदिनाथ जैन मंदिर में भव्य एवं संगीतमय श्री नंदीश्वर महामंडल विधान तथा श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान का शुभारंभ श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ हुआ। यह आयोजन 21 से 29 जुलाई 2026 तक प्रतिदिन विविध धार्मिक कार्यक्रमों के साथ सम्पन्न होगा।
अष्टान्हिका महापर्व का आध्यात्मिक महत्व
जैन धर्म में अष्टान्हिका महापर्व को अत्यंत पवित्र एवं आराधनामय पर्व माना जाता है। यह पर्व श्री नंदीश्वर द्वीप स्थित 52 शाश्वत जिनालयों की दिव्य आराधना का स्मरण कराता है। जैन आगमों के अनुसार सौधर्म इन्द्र सहित असंख्य देवगण वहां भगवान जिनेन्द्र की निरंतर पूजा-अर्चना करते हैं। पृथ्वी पर श्री नंदीश्वर महामंडल विधान उसी दिव्य आराधना का भावपूर्ण अनुकरण है।
प्रतिदिन होंगे धार्मिक अनुष्ठान
आयोजन के अंतर्गत प्रतिदिन प्रातः श्रीजी का अभिषेक एवं शांतिधारा सम्पन्न होगी। इसके पश्चात प्रातः 7:00 बजे से 9:00 बजे तक संगीतमय श्री नंदीश्वर महामंडल विधान, 52 जिनालयों के 52 अर्घ्य, जयमाला तथा अन्य धार्मिक क्रियाएं सम्पन्न कराई जाएंगी। श्रद्धालु प्रतिदिन पूजन एवं अर्घ्य समर्पित कर धर्मलाभ अर्जित करेंगे।
सिद्धचक्र विधान भी जारी
इस अवसर पर श्री 1008 भगवान महावीर समवशरण मंदिर में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान भी श्रद्धापूर्वक आयोजित किया जा रहा है। दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने 16 अर्घ्य समर्पित किए। साथ ही सुखोदय तीर्थ नसियाजी में सामूहिक पूजन का आयोजन भी निरंतर चल रहा है।
धर्मप्रभावना का अनुपम अवसर
वीणा दीदी ने कहा कि यह महापर्व श्रद्धालुओं के लिए धर्म, भक्ति, साधना और आत्मचिंतन का श्रेष्ठ अवसर है। महापर्व के माध्यम से जिनभक्ति, आत्मशुद्धि, सम्यक्त्व एवं मोक्षमार्ग की भावना को सुदृढ़ करने का संदेश दिया जा रहा है।













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