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पेड़-पौधों का वास्तु के अनुसार सही स्थान : वास्तु का वास्तविक उद्देश्य अंधविश्वास नहीं


भारतीय संस्कृति में वृक्षों को केवल पौधा नहीं, बल्कि जीवनदाता और देवतुल्य माना गया है। हमारे शास्त्रों में वृक्षों का महत्व बताते हुए कहा गया है। पेड़ों और पौधों को लगाने के वास्तु के बारे में पढ़िए, यह आलेख….। राजीव सिंघई की प्रस्तुति


भारतीय संस्कृति में वृक्षों को केवल पौधा नहीं, बल्कि जीवनदाता और देवतुल्य माना गया है। हमारे शास्त्रों में वृक्षों का महत्व बताते हुए कहा गया है—

“दशकूपसमावापी, दशवापीसमो ह्रदः।

दशह्रदसमः पुत्रो, दशपुत्रसमो द्रुमः॥”

अर्थात दस कुओं के बराबर एक बावड़ी, दस बावड़ियों के बराबर एक सरोवर, दस सरोवरों के बराबर एक पुत्र और दस पुत्रों के बराबर एक वृक्ष माना गया है।

तुलसी – उत्तर, पूर्व या ईशान कोण में लगाएँ। यह घर में शुद्धता, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति का संचार करती है। बड़े वृक्ष – नीम, अशोक, नारियल, अर्जुन आदि दक्षिण या पश्चिम दिशा में लगाना श्रेष्ठ है।

ये गर्मी रोकते हैं और घर को प्राकृतिक सुरक्षा प्रदान करते हैं।

छोटे पौधे – उत्तर और पूर्व दिशा में तुलसी, गेंदा, पुदीना, एलोवेरा आदि लगाएँ। इससे प्रकाश और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है।

पीपल और बरगद – अत्यंत पवित्र वृक्ष हैं, परंतु इन्हें घर के भीतर नहीं बल्कि मंदिर, आश्रम, तालाब या बड़े खुले स्थानों में लगाना उचित है, क्योंकि इनकी जड़ें भवन की नींव को नुकसान पहुँचा सकती हैं। गुलाब, चमेली, चंपा, अनार, नारियल और अशोक शुभ माने गए हैं। ये सौंदर्य, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक वातावरण को बढ़ाते हैं। कांटेदार पौधे (कैक्टस आदि) तथा विषैले दूधिया पौधे (आक, थूहर आदि) घर के मुख्य भाग में लगाने से बचना चाहिए। मुख्य द्वार के सामने विशाल वृक्ष प्रकाश और ऊर्जा के प्रवाह को बाधित करते हैं, इसलिए उचित दूरी बनाए रखना आवश्यक है।

वास्तु का वास्तविक उद्देश्य अंधविश्वास नहीं, बल्कि प्रकृति, पर्यावरण, स्वास्थ्य और स्थापत्य विज्ञान के बीच संतुलन स्थापित करना है। कई नियमों के पीछे वैज्ञानिक और व्यावहारिक कारण भी हैं। निष्कर्ष: प्रत्येक वृक्ष प्रकृति का अमूल्य उपहार है। सही दिशा और उचित स्थान पर लगाए गए पेड़-पौधे घर में स्वास्थ्य, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं। आज के प्रदूषण और पर्यावरण संकट के दौर में वृक्षारोपण केवल धार्मिक कार्य नहीं, बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। आइए, इस वर्षा ऋतु में कम से कम 10 पौधे लगाने का संकल्प लें और आने वाली पीढ़ियों को हरित एवं स्वस्थ भविष्य प्रदान करें।

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