कुचामन सिटी स्थित श्री 1008 भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित नौ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने 32 गुणों एवं 64 ऋद्धियों के अर्घ्य समर्पित कर विश्व शांति, सुख-समृद्धि और अमन-चैन की मंगलकामना की। पढ़िए श्रीफल साथी सुभाष पहाड़िया की यह रिपोर्ट।
कुचामन सिटी। श्री 1008 भगवान महावीर दिगंबर जैन मंदिर, डीडवाना रोड, कुचामन सिटी में विश्व शांति, सुख-समृद्धि एवं अमन-चैन की मंगलभावना से आयोजित नौ दिवसीय श्री 1008 सिद्धचक्र महामंडल विधान के अंतर्गत बुधवार को प्रातः भव्य कलशाभिषेक एवं शांतिधारा का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के साथ सम्पन्न हुआ।
कलशाभिषेक एवं शांतिधारा का सौभाग्य
कलशाभिषेक एवं शांतिधारा करने का सौभाग्य श्रावक श्रेष्ठी भंवरलाल, कमला देवी, जूली, आशीष, जीती एवं यश झाझरी परिवार तथा राजेश, मंजूला, मनोज, ममता, अंकित, नीता एवं रम्यक पांडया परिवार को प्राप्त हुआ।
अष्टान्हिका पर्व का महत्व
लालचंद पहाड़िया ने बताया कि अष्टान्हिका पर्व वर्ष में तीन बार—कार्तिक, फाल्गुन एवं आषाढ़ मास में मनाया जाता है। इन पावन अवसरों पर नंदीश्वर द्वीप विधान एवं सिद्धचक्र विधान का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस अवसर पर 21 श्रावकों ने भगवान का जलाभिषेक कर पुण्यार्जन अर्जित किया।
32 गुणों एवं 64 ऋद्धियों के अर्घ्य समर्पित
सुरेश पांडया ने बताया कि कलशाभिषेक के पश्चात देव-शास्त्र पूजन, पंचमेरु पूजन, नंदीश्वर द्वीप पूजन एवं मूलनायक भगवान महावीर की पूजा सम्पन्न हुई। इसके बाद आयोजित सिद्धचक्र विधान में श्रद्धालुओं ने 32 गुणों सहित 64 ऋद्धियों के अर्घ्य समर्पित कर विश्व शांति एवं समस्त प्राणियों के कल्याण की मंगलकामना की।
श्रद्धालुओं की रही उत्साहपूर्ण सहभागिता
विधान में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता करते हुए भक्ति एवं श्रद्धा के साथ पूजन-अर्चन किया तथा धर्मलाभ अर्जित किया। पूरे मंदिर परिसर में धार्मिक उल्लास और भक्ति का वातावरण बना रहा।













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