दर्शन विशुद्धि आदि 16 कारण भावना को चिंतन भाने से तीर्थंकर नाम कर्म की सातिशय पुण्य प्रकृति का बंध होता है। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने श्री चंद्रप्रभ...
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अहंकार और धन यहीं धरे रह जाएंगे जो साथ जाएगा। वह है आपका शांत स्वभाव। हमें अपने स्वभाव की ओर लौटना है और दूसरों की मदद करने वाली आपकी नेक नियत को बनाना है। यह...
आचार्य श्री विशद सागर जी महाराज संघ सहित पदमपुरा, जयपुर में विराजमान हैं। प्रातः कालीन दिनचर्या में आचार्य श्री ने जाप, पूजा, अभिषेक और विश्व शांति के लिए...
दिगंबर जैन धर्मशाला, शामली उप्र में गणाचार्य श्री विराग सागर जी के शिष्य आचार्य श्री विनिश्चय सागर जी ने कहा कि मनुष्य का वास्तविक स्वरूप उसकी आत्मा का शुद्ध...
जैन श्रमणों (साधु-साध्वियों) के पैदल विहार, प्रवास और चातुर्मास के समय ठहरने के दौरान हीटवेब से सुरक्षा के लिए अल्पसंख्यक मामलात विभाग के जिला अल्पसंख्यक...
आचार्य ज्ञानसागरजी महाराज के 14वें आचार्य पदारोहण दिवस के पावन उपलक्ष्य में जैन मित्र मंडल ने सार्वजनिक स्थानों पर शीतल जल एवं शरबत का वितरण किया। मुरैना में...
तीर्थ स्वरूप दिगंबर जैन आदिनाथ जिनालय छत्रपति नगर में तीन दिवसीय प्रवास पर पधारे श्रमण संस्कृति के पट्टाचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज के शिष्य मुनिश्री...
दिगंबर जैन सोशल ग्रुप, गंगापुर सिटी की ओर से रेलवे स्टेशन पर गत 18 वर्षों से संचालित निःशुल्क जल सेवा निरंतर जारी है। आपकी यात्रा, हमारी सेवा के संकल्प के साथ...
चंद्रपुरी, बड़ के बालाजी की पाठशाला में मंगलवार को आचार्य श्री वर्धमानसागर जी ने उपाध्याय और साधु परमेष्ठी के मूलगुणों की व्याख्या की। इसमें जिनवाणी के 11 अंग...
सत्ता और हुकूमत का शौक सभी को होता है, होना भी चाहिए। यदि आपको राजा बनना है तो राजा के साथ रहने की विधि सीखना होगी। नेता बनना है तो अपने नेता की प्रशंसा करते...








