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चातुर्मास में वैराग्य का बीजारोपण: फलीभूत 7 प्रतिमा धारी 64 वर्षीय मंजू दीदी लेंगी जेनेश्वरी दीक्षा, रत्नत्रय रूपी तीन दिवसीय दीक्षा समारोह हुआ प्रारंभ 


दीक्षा पूर्व केश लोचन में दीक्षार्थी की कष्ट परिषह सहने की शक्ति की अग्नि परीक्षा होती है। दीक्षा कांटों का मार्ग है। तलवार की धार पर चलने लोहे के चने चबाने के समान है। दीक्षार्थी की सरलता सहनशीलता से यह कठिन मार्ग भी सरल हो जाता है। आचार्य श्री सिद्धांत सागर जी ने मानव के दीक्षा, शिक्षा,कर्म सिद्धांत, आत्म संस्कार, सल्लेखना आदि क्रियाओं की जानकारी उपदेश में दी। इंदौर से पढ़िए, श्रीफल साथी डॉ.राजेश पंचोलिया की यह खबर…


इंदौर (परिवहन नगर)। दीक्षा पूर्व केश लोचन में दीक्षार्थी की कष्ट परिषह सहने की शक्ति की अग्नि परीक्षा होती है। दीक्षा कांटों का मार्ग है। तलवार की धार पर चलने लोहे के चने चबाने के समान है। दीक्षार्थी की सरलता सहनशीलता से यह कठिन मार्ग भी सरल हो जाता है। आचार्य श्री सिद्धांत सागर जी ने मानव के दीक्षा, शिक्षा,कर्म सिद्धांत, आत्म संस्कार, सल्लेखना आदि क्रियाओं की जानकारी उपदेश में दी। उन्होंने कहा कि दीक्षार्थी मुमुक्षु होता हैं, इस कारण उसकी संसार में रहने की इच्छा नहीं होती है। जीवन के किसी भी पल में वैराग्य उमड सकता है, संसार में रहकर प्राणी संसार को तज सकता है। वैराग्य की यह पंक्तियां बिरले भव्य प्राणियों के जीवन में चरितार्थ होती है। चातुर्मास कराना समाज के हित में कितना लाभदायक होता है। यह परिवहन नगर इंदौर में देखने को आया। जब वर्ष 2025 का वर्षायोग अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्यसागर जी ने परिवहन नगर इंदौर में संपन्न किया।

मुनि पूज्यसागर जी ने वैराग्य संयम की प्रेरणा दी

भावना अमित जैन के बताया कि उस समय मुनि पूज्यसागर जी ने वैराग्य संयम की प्रेरणा दी। वर्ष 1962 में जन्मी मंजू दीदी ने 7 प्रतिमा के व्रत, मुनि श्री पूज्य सागर जी से ग्रहण किए। प्रतिमाधारी मंजू दीदी में सतत वैराग्य संयम धारण करने की भावना दिन प्रतिदिन बलवती होती गई। कहते हैं खरबूजे को देख कर खरबूजा रंग बदलता हैं किंतु यहां साधु को देख साधु होने का वैराग्य बीजारोपण अंकुरित हुआ।

आपके गृहस्थ अवस्था के पतिदेव ने भी ली थी दीक्षा 

उल्लेखनीय है कि आपके गृहस्थ अवस्था के पतिदेव सन 1957 में जन्मे रमेश जैन इंदौर ने भी आचार्य श्री अभिनंदन सागर जी के शिष्य आचार्य श्री आदर्श सागर जी से 16 अक्टूबर वर्ष 2016 को श्री सम्मेद शिखर जी में दीक्षा लेकर क्षुल्लक श्री अरिहंत सागर जी हुए। अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी के दीक्षा गुरु भी आचार्य श्री अभिनंदन सागर जी हुए। उन्हीं के साथ संघ में रहते हुए आपने संयम किया। संयोग है कि आचार्य श्री आदर्श सागर जी आपके गृहस्थ अवस्था के जीजाजी हैं।

गोद भरकर दीक्षा की अनुमोदना की

क्षुल्लक श्री अरिहंत सागर जी की समाधि के बाद स्वास्थ्य कारणों से व्रती मंजू दीदी इंदौर वापस आ गए। समाज अध्यक्ष नवनीत जैन, देवचंद जैन सचिव के अनुसार तीन दिवसीय कार्यक्रम के अंतर्गत 20 जुलाई को व्रती मंजू दीदी को मेहंदी हल्दी लगाने की रस्म समाज में परिजनों ने समाज ने संपन्न की। रात्रि में परिजनों, समाज ने श्रीफल सूखे मेवे फलों गोद भरकर दीक्षा की अनुमोदना की।

22 को होगी दीक्षा 

21 जुलाई को प्रातः परिवहन नगर जैन समाज ने दीक्षार्थी की शोभायात्रा निकाली। इसमें काफी संख्या में लोगों ने भाग लिया। आज दीक्षार्थी के केशलोचन हुए शाम को 48 दीपकों से श्री भक्तांमर की दीप आराधना होगी। 22 जुलाई को दीक्षार्थी द्वारा श्री महावीर विधान की पूजा पश्चात दीक्षा संस्कार पंच मुष्टि केश लोच आचार्य श्री सिद्धांत सागर जी द्वारा कर मस्तक एवं हाथों में संस्कार किए जाएंगे।

परिवहन नगर मंदिर का स्थापना दिवस पर 4 थी दीक्षा

कहते हैं शुरुआत अच्छी होना चाहिए। जब कोई युवा अवस्था में दीक्षा लेता है तो अनेकों को प्रेरणा मिलती हैं। परिवहन मंदिर के सदस्य संगीता राजेश पंचोलिया की पुत्री ने मात्र 29 वर्ष की अल्पायु में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से बाल ब्रह्मचारिणी सिद्धा दीदी ने श्रवण बेलगोला में 25 अप्रैल 2018 को दीक्षा लेकर आर्यिका श्री महायश मति जी बनी। परिवहन निवासी श्री भाग्यसागर जी की 14 अगस्त 2021 को क्षुल्लक दीक्षा आचार्य श्री विद्या सागर जी से हुई। मुकेश जैन की माताजी की क्षुल्लिका दीक्षा अजमेर में आर्यिका श्री संगम मति से 3 वर्ष पूर्व होकर क्षुल्लिका श्री सानिध्य मति नामकरण हुआ। अब चार गतियों से छुटकारा पाने के लिए अर्थ, काम के बाद धर्म पुरुषार्थ मंजू दीदी कर 22 जुलाई को दीक्षा ले रही हैं।

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