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आचार्य वर्द्धमानसागर पाठशाला के पूर्व छात्रों का भव्य मैत्री मिलन सम्पन्न: वर्षों बाद एक मंच पर मिले सहपाठी


आचार्य वर्द्धमानसागर पाठशाला के पूर्व छात्र-छात्राओं का भव्य मैत्री मिलन इंदौर के नखराली ढाणी में आत्मीय वातावरण में सम्पन्न हुआ। विभिन्न शहरों से पहुंचे पूर्व विद्यार्थियों ने छात्र जीवन की स्मृतियों को साझा करते हुए गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। पढ़िए श्रीफल साथी सन्मति जैन काका की यह रिपोर्ट।


सनावद. आचार्य वर्द्धमानसागर पाठशाला के पूर्व छात्र-छात्राओं का भव्य मैत्री मिलन समारोह इंदौर स्थित नखराली ढाणी में हर्षोल्लास, आत्मीयता एवं पारिवारिक वातावरण के बीच सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर भोपाल, इंदौर, सनावद, खंडवा, महेश्वर, मंडलेश्वर एवं पीथमपुर सहित विभिन्न नगरों से पूर्व विद्यार्थी वर्षों बाद एक मंच पर एकत्रित हुए।

गुरुजनों के संस्कारों का किया स्मरण

कार्यक्रम का शुभारंभ नवकार महामंत्र एवं मंगलाचरण से हुआ। सभी पूर्व छात्र-छात्राओं ने अपने छात्र जीवन की मधुर स्मृतियों को साझा करते हुए आचार्य वर्द्धमानसागर पाठशाला में प्राप्त संस्कारों, अनुशासन तथा अपनी आदरणीय शिक्षिकाओं के स्नेह, मार्गदर्शन एवं समर्पण को भावपूर्वक याद किया। उपस्थित सभी ने गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।

ब्रह्मचारिणी सारिका दीदी का भावपूर्ण संदेश

इस अवसर पर सभी ने अपनी प्रिय सहपाठी ब्रह्मचारिणी सारिका दीदी का विशेष रूप से स्मरण किया। आयोजन की जानकारी मिलने पर उन्होंने संदेश भेजा— “मैं तुम में हूँ।” उनके इन भावपूर्ण शब्दों ने उपस्थित सभी के हृदय को भावविभोर कर दिया और सभी ने उनके स्नेह एवं आशीर्वाद को अपने साथ महसूस किया।

गीत-संगीत और स्मृतियों से सजा आयोजन

मैत्री मिलन के दौरान मनोरंजक गतिविधियाँ, सामूहिक गीत-संगीत, फोटोग्राफी एवं स्वादिष्ट भोजन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के समापन पर सभी सदस्यों को दिगंबर जैन बड़ा मंदिर के मूलनायक भगवान श्री 1008 पार्श्वनाथ का स्मृति-चित्र भेंट कर इस मिलन को चिरस्मरणीय बनाया गया।

मित्रता और संस्कारों का प्रेरक उत्सव

आयोजकों ने बताया कि यह आयोजन केवल पुराने साथियों का पुनर्मिलन नहीं था, बल्कि गुरुजनों के प्रति श्रद्धा, जैन संस्कारों के प्रति समर्पण, मित्रता की मधुरता और आजीवन बने रहने वाले आत्मीय संबंधों का प्रेरणादायी उत्सव बन गया।

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