आगरा स्थित अतिशय क्षेत्र श्री नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर नसिया जी में भगवान नेमिनाथ निर्वाण महोत्सव एवं तीर्थ रक्षा संकल्प समारोह श्रद्धा और भक्ति के साथ आयोजित हुआ। संतों ने तीर्थों एवं साधु-संतों की सुरक्षा के लिए समाज को जागरूक रहने का संदेश दिया। पढ़िए श्रीफल साथी राहुल जैन की यह रिपोर्ट।
आगरा। अतिशय क्षेत्र श्री नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर, नसिया जी, मोतीलाल नेहरू पीर कल्याणी रोड पर परम पूज्य आचार्य श्री सौभाग्यसागर जी महाराज ससंघ, आचार्य श्री 108 सुरत्नसागर जी महाराज ससंघ तथा मुनि श्री 108 समत्वसागर जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य में भगवान नेमिनाथ निर्वाण महोत्सव एवं तीर्थ रक्षा संकल्प समारोह श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ सम्पन्न हुआ।
निर्वाण महोत्सव में हुआ विशेष पूजन
भगवान श्री नेमिनाथ के निर्वाण महोत्सव पर गिरनार पर्वतराज की प्रतीकात्मक पाँच टोकों पर श्रद्धालुओं ने निर्वाण लाडू अर्पित किए। प्रथम निर्वाण लाडू का सौभाग्य प्रदीप जैन पी.एन.सी. परिवार को प्राप्त हुआ। इसके अतिरिक्त निर्मल कुमार मोठ्या, रोहित जैन अहिंसा, हीरालाल बैनाड़ा, स्वरूपा जैन सन्मति परिवार तथा राजेश जैन करपेट ने भी लाडू अर्पित किए। भगवान का अभिषेक, दीप प्रज्ज्वलन, पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट एवं पंडित आशुतोष शास्त्री के सान्निध्य में विधान सम्पन्न हुआ। विशाल जैन पार्टी द्वारा संगीतमय भक्ति प्रस्तुत की गई।
संतों की सुरक्षा समाज का दायित्व
आचार्य श्री सुरत्नसागर जी महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि साधु-संतों की सुरक्षा केवल सरकार का दायित्व नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि जब भी संत विहार पर निकलें, समाज के लोगों को उनके साथ चलकर सहयोग करना चाहिए। उन्होंने गिरनार पर्वत, प्राचीन जिनालयों और जैन तीर्थों की सुरक्षा के प्रति भी समाज को सजग रहने का संदेश दिया तथा मंदिरों के पंजीकरण एवं संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।
सत्य और धर्म की रक्षा का संदेश
मुनि श्री समत्वसागर जी महाराज ने अपने प्रेरक प्रवचन में सत्य के पक्ष में दृढ़ रहने की प्रेरणा देते हुए कहा कि इतिहास इस बात का साक्षी है कि भगवान श्रीकृष्ण ने सदैव सत्य का साथ दिया। उन्होंने कहा कि गिरनार पर्वत भगवान नेमिनाथ की तपोभूमि एवं मोक्षभूमि है और इसके ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व को स्वीकार करना सत्य का सम्मान है। उन्होंने समाज से धर्म और सत्य की रक्षा के लिए संगठित रहने का आह्वान किया।
भक्ति, आरती एवं समाज की सहभागिता
कार्यक्रम का संचालन मनोज जैन बाकलीवाल ने किया। रात्रि में भगवान की 1008 दीपकों से भव्य महाआरती, कथा एवं भजन संध्या का आयोजन हुआ। समारोह में समाज के अनेक पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और तीर्थ रक्षा के संकल्प के साथ आयोजन को सफल बनाया।













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