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समाज के डिजिटल और सांस्कृतिक एकीकरण का नया मार्ग प्रशस्त : ग्वालियर में एपीपीएस की समीक्षा बैठक में नई सामाजिक क्रांति का शंखनाद


ग्रेटर ग्वालियर के क्षेत्रीय संयोजक, मुरार समाज के पदाधिकारी एवं समाज जनों के साथ महावीर भवन में एपीपीएस की बैठक हुई। जिसमें लश्कर, ग्वालियर, मुरार के क्षेत्रीय संयोजकों के साथ समाजोत्थान के कार्यों की समीक्षा की गई। मुरार ग्वालियर से मनोज जैन नायक की रिपोर्ट…


मुरार ग्वालियर। ग्रेटर ग्वालियर के क्षेत्रीय संयोजक, मुरार समाज के पदाधिकारी एवं समाज जनों के साथ महावीर भवन में एपीपीएस की बैठक हुई। जिसमें लश्कर, ग्वालियर, मुरार के क्षेत्रीय संयोजकों के साथ समाजोत्थान के कार्यों की समीक्षा की गई। बैठक के शुभारंभ में चित्र अनावरण एपीपीएस के परम संरक्षक सुदीप जैन गुरुग्राम, बालचंद जैन लश्कर ने किया। दीप प्रज्वलन जैन समाज मुरार के अध्यक्ष दिनेशचंद जैन ऐसाह ने किया। मंगलाचरण रविंद्र जैन जमूसर वाले भोपाल ने किया एवं कार्यक्रम का संचालन मुरार के क्षेत्रीय संयोजक जीएल जैन ने किया। बैठक में सभी समाजजनों के बीच एपीपीएस के राष्ट्रीय संयोजक अजय जैन शिवपुरी, रविंद्र जैन जमूसर भोपाल एवं रूपेश जैन दिल्ली ने अपनी बात को रखते हुए विस्तृत चर्चा की। विगत दिवस मुरार क्षेत्र में आयोजित अविवाहित प्रतिभाएं प्रस्तुति समूह एपीपीएस की समीक्षा बैठक मात्र एक चर्चा नहीं, बल्कि समाज की एकता और भविष्य निर्माण की दिशा में एक नूतन शंखनाद है। संगठन में शक्ति और पुरुषार्थ के संकल्प के साथ इस बैठक ने समाज के डिजिटल और सांस्कृतिक एकीकरण का नया मार्ग प्रशस्त किया है।

डिजिटल तकनीक से रिश्तों में सुगमता

समाज की डिजिटल ऐप और परिचय पत्रिका के माध्यम से अब अभिभावकों के लिए योग्य जीवनसाथी का चयन करना आसान और पारदर्शी होगा। रुपेश ने ऐप की सरलता पर विस्तार से चर्चा की। यह ऐप केवल एक डेटाबेस नहीं, बल्कि परिवारों को जोड़ने वाला एक ‘मजबूत सेतु’ बनेगा।

प्रामाणिक डेटा सशक्त समाज की नींव

अजय जैन (शिवपुरी) ने 21 वर्ष से अधिक आयु के युवाओं के शत-प्रतिशत डेटा संकलन की योजना प्रस्तुत की। सटीक और विश्वसनीय डेटा होने से परिवारों को सही जानकारी मिलेगी और चयन प्रक्रिया में समय की बचत होगी।

 सामाजिक एकजुटता और ऊर्जा का संचार 

बैठक में एपीपीएस के संरक्षकों (सुदीप गुरुग्राम, बालचन्द ग्वालियर) और क्षेत्रीय संयोजकों के साथ ग्वालियर, मुरार और लश्कर के गणमान्य समाजजन एक साथ नजर आए। यह एकजुटता दर्शाती है कि समाज अपने युवाओं के भविष्य के प्रति कितना गंभीर है।

 संस्कारों का संरक्षण

संस्था का मुख्य उद्देश्य आने वाली पीढ़ी को ‘सुसंस्कृत और सभ्य समाज’ सौंपना है। यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि युवा आधुनिक प्रगति के साथ-साथ अपनी जैन परंपराओं और संस्कारों से भी जुड़े रहें।

आत्मनिर्भरता और फिजूलखर्ची पर रोक

रविन्द्र जैन (जमूसर) के अनुसार संस्था के माध्यम से प्रति वर्ष लगभग 500 संबंध तय हो रहे हैं। इससे न केवल अनावश्यक खर्चों में कमी आ रही है, बल्कि परिवारों के बीच सीधा और सात्विक संपर्क भी बढ़ रहा है।

 बैठक के दूरगामी परिणाम 

’सांस्कृतिक हस्तांतरण’ हम अगली पीढ़ी को केवल बायोडाटा नहीं, बल्कि एक संस्कारित परिवेश दे रहे हैं। लश्कर, मुरार और ग्वालियर के गणमान्य नागरिकों का एक साथ बैठना आपसी प्रेम और वात्सल्य को बढ़ाता है। अध्यक्ष दिनेश चंद्र जैन ने स्पष्ट किया कि जब समाज अपनी समस्याओं का समाधान खुद करने लगता है, तो वह बौद्धिक रूप से और अधिक श्रेष्ठ बनता है। जिस समाज के पास बुजुर्गों का आशीर्वाद और युवाओं का जोश हो, वह सदैव प्रगति करता है। मुरार की यह बैठक पूरे भारत के जैन समाज के लिए एक श्रोल मॉडलश् सिद्ध होगी। सही समय पर लिया गया यह निर्णय समाज की उन्नति की पहली सीढ़ी है। रिश्ते केवल पन्नों पर नहीं, दिलों में बसते हैं। एपीपीएस का यह प्रयास समाज के साथ मिलकर मात्र एक डेटाबेस नहीं, बल्कि हमारी गौरवशाली परंपराओं को आधुनिकता के साथ जोड़ने की एक पुनीत कोशिश है। हम सब मिलकर एक ऐसा परिवेश बनाएँ जहाँ हमारी आने वाली पीढ़ी को केवल एक बायोडाटा नहीं, बल्कि संस्कारों की धरोहर और अपनों का अटूट विश्वास मिले क्योंकि, जब समाज अपनों का हाथ थामता है, तभी भविष्य मुस्कुराता है।

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