आर्यिका श्री सिद्धश्री माताजी के सानिध्य में बुधवार को वागड़ के बड़े बाबा आदिनाथ भगवान नेमिनाथ भगवान की शांतिधारा अभिषेक बड़े भक्ति भाव से की गई। अभिनंदन नाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक के उपलक्ष्य में 1008 भगवान महावीर समवशण मंदिर, सुखोदय तीर्थ नसिया जी में भी विशेष शांतिधारा अभिषेक किया गया। नौगामा से पढ़िए, सुरेशचंद्र गांधी की रिपोर्ट…
नौगामा। आर्यिका श्री सिद्धश्री माताजी के सानिध्य में बुधवार को वागड़ के बड़े बाबा आदिनाथ भगवान नेमिनाथ भगवान की शांतिधारा अभिषेक बड़े भक्ति भाव से की गई। अभिनंदन नाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक के उपलक्ष्य में 1008 भगवान महावीर समवशण मंदिर, सुखोदय तीर्थ नसिया जी में भी विशेष शांतिधारा अभिषेक किया गया। अभिषेक के बाद माताजी के मुखारविंद से निर्वाण लाडू का अर्घ्य बोलकर बड़े भक्ति भाव से चढ़ाया गया। प्रथम लाडू चढ़ाने का सौभाग्य गांधी सिद्धि दिलीपकुमार एवं मंडीदीप भोपाल से पधारे हुए श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाया गया एवं महिला मंडल द्वारा बड़े भक्ति भाव से भगवान अभिनंदन नाथ का पूजन किया गया। इसके बाद माताजी का मंगल प्रवचन हुआ।
अपने को जानो पहचानो और उसमे लीन हो जाओ
माताजी ने अपने मंगल प्रवचन में कहा कि यह जीव अपने स्वभाव को नहीं जानता पर दूसरों के स्वभाव को जानने में उसको मजा आता है। एक व्यक्ति जंगल के वृक्ष पर बैठा-बैठा विचार करता है। पूरा जंगल जल रहा है हाथी,शेर,हिरण सब जल रहें हैं पर वह मूर्ख यह विचार नहीं करता कि यह आग मुझे भी जला देगी। उसी प्रकार यह राग द्वेष परिणाम मेरे भी दुःख के कारण है, यह नहीं जानता और उसमें मस्त रहता है। भैया अपने को जानो पहचानो और उसमे लीन हो जाओ यही मुक्ति का मार्ग है एवं इस अवसर पर मंडीदीप से पधारे हुए श्रद्धालुओं का दिगंबर जैन समाज नौगामा की ओर से तिलक लगाकर उपरना उड़ाकर स्वागत अभिनंदन किया गया एवं माताजी को श्रीफल भेंटकर ग्रीष्मकालीन वाचना के लिए निवेदन किया गया। शाम को आचार्य भक्ति के बाद जबलपुर से पधारे हुए प्रदीप भैया पीयूष का मंगल प्रवचन हुआ। मंदिर में बालिका मंडल द्वारा भक्तामर के 48 दीप विधान के 48 दीप प्रज्वलित किए गए।













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