मानव जीवन में दान का बहुत महत्व है। जिस प्रकार रक्त के धब्बों को जल वो देता है उसी प्रकार हमारे जीवन में जो दोष लगें हुए हैं उन्हें सुपात्रों को दान देकर मिटाया जा सकता है। पूर्वाचार्यों ने दानदाता के सात गुणों का उल्लेख आगम ग्रंथों में किया है। दाता को हमेशा सतर्क रहते हुएं दान देना चाहिए। इंदौर से पढ़िए, ओम पाटोदी की यह रिपोर्ट…
इंदौर। मानव जीवन में दान का बहुत महत्व है। जिस प्रकार रक्त के धब्बों को जल वो देता है उसी प्रकार हमारे जीवन में जो दोष लगें हुए हैं उन्हें सुपात्रों को दान देकर मिटाया जा सकता है। पूर्वाचार्यों ने दानदाता के सात गुणों का उल्लेख आगम ग्रंथों में किया है। दाता को हमेशा सतर्क रहते हुएं दान देना चाहिए ताकि कोई दोष नहीं लगे। यह बात आचार्य श्री विनम्र सागर जी के परम प्रभावक शिष्य मुनि श्री विनंद सागर जी ने सिद्धोदय सिद्ध क्षेत्र नेमावर में दान पर्व अक्षय तृतीया के अवसर पर दोपहर में स्वध्याय के दौरान व्यक्त किए। चूंकि आदिनाथ भगवान का एक वर्ष के उपवास के पश्चात इक्क्षूरस (गन्ने के रस) का आहार देकर पारणा राजा श्रैयांस द्वारा करवाया गया है। आहार दान का महत्व बताते हुए उन्होंने आहार दान करने वाले दाता पर इन सात गुणों को घटते हुए बताया कि जब भी मुनि राज को आहार दो तो दाता का पहला गुण श्रद्धा है, आहार श्रद्धा के साथ रुचि पूर्वक दो, श्रद्धा के साथ भक्ति भाव प्रकट होने चाहिए। तीसरा गुण विज्ञान अर्थात विवेक पूर्वक मुनि राज के स्वास्थ्य के अनुकूल आहार दिया जाना चाहिए। इसी प्रकार तुष्टि मतलब संतोष के साथ लोभ रहित भाव से आहार दिया जाना चाहिए। दाता में क्षमा का गुण होना चाहिए और दया भाव के साथ चौका लगाना चाहिए। कोई बाहरी सज्जन आपके चौंके में आहार देने आते हैं और उनसे कोई ग़लती भी हो जाए तो उनके प्रति दया और क्षमा भाव रखना चाहिए। इस प्रकार सुपात्र को आहार करवाने से पापों का क्षय और पुण्य में वृद्धि होती है।
नवकार मंत्र पर बनाए गए मोबाइल गेम की जानकारी दी
इस अवसर पर वर्द्धमानपुर शोध संस्थान के सदस्य बदनावर वर्द्धमानपुर, इंदौर और भोपाल से नेमावर पहूंचकर मुनि श्री विनंद सागर जी एवं क्षुल्लक श्री विश्वगुण सागर जी को आहार देने का लाभ प्राप्त किया। इस दौरान संस्थान के अभय पाटोदी ने नवकार मंत्र पर बनाए गए मोबाइल गेम (एप) के बारे में जानकारी दी। जिसके बारे में जानकर मुनि श्री बहुत बहुत आशीर्वाद दिया। संस्थान के एक प्रकल्प वर्धमान 2550 के बारे में विपिन पाटनी ने जानकारी दी। वहीं बदनावर वर्द्धमानपुर नगर की ऐतिहासिकता और नगर से प्राप्त तीर्थंकर प्रतिमाओं के बारे में जानकारी संस्थान के ओम पाटोदी ने दी। मुनि ने बहुत बहुत आशिर्वाद दिया। इस अवसर पर मनोरमा पाटनी, मोना पाटोदी, अंतिम सेठी, दिपाली पाटनी, आशी पाटोदी, दीक्षा सेठी आदि सदस्य उपस्थित थे।













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