दिल्ली हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग में वर्ष 2023 से चेयरमैन और सदस्यों के रिक्त पदों को भरने संबंधी जनहित याचिका वरिष्ठ समाजसेवी सलेकचंद जैन द्वारा लगाईं याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली सरकार को दो सप्ताह में कारगर कदम उठाने का निर्देश दिया है। नईदिल्ली से पढ़िए, यह रिपोर्ट…
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग में वर्ष 2023 से चेयरमैन और सदस्यों के रिक्त पदों को भरने संबंधी जनहित याचिका वरिष्ठ समाजसेवी सलेकचंद जैन द्वारा लगाईं याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली सरकार को दो सप्ताह में कारगर कदम उठाने का निर्देश दिया है। राजेश जैन दद्दू ने बताया कि याचिका सलेक चंद जैन बनाम जीएनसीटीडी में मांग की गई है कि आयोग में चेयरमैन और सदस्यों के पदों पर जैन समाज के व्यक्ति को भी नामित’ किया जाए तथा चेयरमैन का पद ’रोटेशन आधार पर विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों से भरा जाए। सलेकचंद जैन ने बताया कि सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने मौखिक रूप से सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि दो हफ्ते में सरकार द्वारा कोई कार्रवाई नहीं हुई तो दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को हाइकोर्ट में तलब किया जाएगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि पद भरने ही नहीं हैं तो फिर दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग बनाने की जरूरत ही क्या थी। इस मामले पर मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने बुधवार को दो बार सुनवाई की। याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता दिनेश प्रसाद राजभर’ ने पक्ष रखा।
इस कारवाई पर कोर्ट द्वारा समाज हित में कारवाई किये जाने पर समाज श्रेष्ठी संजय जैन विश्व जैन संगठन के अध्यक्ष वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. जैनेन्द्र जैन, महावीर ट्रस्ट के अध्यक्ष अमित कासलीवाल, राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ के मंयक जैन, जैन राजनीतिक चेतना मंच के सुभाष काला, हंसमुख गांधी, टीके वेद एवं फेडरेशन की राष्ट्रीय शिरोमणि संरक्षिका पुष्पा कासलीवाल महिला परिषद् की मुक्ता जैन एवं रेखा जैन श्रीफल ने कोर्ट की इस कार्रवाई को समाज हित में बताया और प्रसन्नता जताई।













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