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विश्व हिंदी दिवस पर विशेष आलेख : हिंदी से मुमकिन है देश की तरक्की


जैन आचार्य विद्यासागर महाराज ने कहा है कि हम लोग हिंदी में सोचते हैं, हिंदी में सपना देखते हैं। तो काम भी हिंदी मे होना चाइए। जब ही देश की तरक्की मुमकिन है। पढ़िए नीति जैन का विशेष आलेख


अंबाह। विश्व हिन्दी दिवस प्रति वर्ष 10 जनवरी को पूरी दुनिया में मनाया जाता है। इसके मनाने का उद्देश्य हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिये जागरूकता पैदा करना और वैश्विक स्तर पर इसे एक अन्तरराष्ट्रीय भाषा के रूप में पेश करना है। इस अवसर पर दुनिया भर के भारत दूतावासों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किये जाते है। वैश्विक स्तर पर हिंदी को लेकर पहला आयोजन 10 जनवरी 1974 को महाराष्ट्र के नागपुर में किया गया था। इस सम्मेलन में 30 देशों के 122 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। साल 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन का उद्घाटन किया था। साल 2006 तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी।

बोलचाल से लेकर लेखन तक हम कई भाषाओं व लिपियों का प्रयोग करते हैं। जैन आचार्य विद्यासागर महाराज ने कहा है कि हम लोग हिंदी में सोचते हैं, हिंदी में सपना देखते हैं। तो काम भी हिंदी मे होना चाइए। जब ही देश की तरक्की मुमकिन है। हिंदी ऐसी भाषा है जो भारतीयों को एक डोर में पिरोए हुए है।बता दें कि, हिंदी की लिपि देवनागरी है।हिंदी भारत की राजभाषा और आधिकारिक भाषा है।1949 में हिंदी को राजभाषा घोषित किया गया। हम भारतीयों के लिए हिंदी केवल भाषा नहीं बल्कि पहचान है। इसलिए तो हम गर्व से कहते हैं- ‘हिंदी हैं हम’।
भारत के साथ ही हिंदी भाषा को विदेशों में बसे भारतीयों ने खास पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई है।

अब धीरे-धीरे विदेशों में भी हिंदी भाषा लोकप्रिय हो रही है। इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि, 2017 में ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में बच्चा, बड़ा दिन, अच्छा और सूर्य नमस्कार जैसे शब्दों को जोड़ा गया। विदेशों में हिंदी के महत्व को बताने और इसे खास दर्जा दिलाने के लिए ही हर साल 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है।

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