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दसलक्षण पर्व के पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म के बारे में जानें : वाणी का करें सदुपयोग ,अप्रिय, कटु, कठोर, शब्द नहीं बोलें

आज उत्तम सत्य धर्म का दिन है। जहां क्षमा , मार्दव , आर्जव , शौच आत्मा का स्वभाव है , वहीं सत्य- संयम- तप त्याग इन गुणों को प्रगट करने के उपाय हैं , या कहें कि...

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कहानी उत्तम सत्य धर्म की : हमेशा सत्य का आदर करें   

सत्य को अपनाने से व्यक्ति खुद की वास्तविकता और आत्मा की गहराई को समझ सकता है। यह आत्म-साक्षात्कार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होता है। सत्य को जानने और...

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दसलक्षण पर्व पर आज जानिए उत्तम सत्य धर्म के बारे में : स्वयं की पहचान ही वास्तव में उत्तम सत्य धर्म है-मुनि पूज्य सागर महाराज

जैन धर्म में सत्य को अत्यंत पवित्र माना जाता है। इसे सच्चाई और ईमानदारी के रूप में देखा जाता है। जैन ग्रंथों में सत्य को “सच्चा”...

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जानिए विभिन्न राज्यों में होने वाली विशेष आराधना के बारे में : भाद्रपद मास में आने वाले दसलक्षण पर्व का होता है विशेष महत्व

दसलक्षण पर्व दिगंबर जैन परंपरा में प्रमुखता से मनाया जाता है। यह दस दिनों का एक विशेष धार्मिक उत्सव है। यह पर्व भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी से शुरू होकर...

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चारूकीर्ति स्वामी की 75वीं जन्मजयंती के उपलक्ष्य में विशेष श्रृंखला-3 : श्रमण संस्कृति के प्रहरी थी चारूकीर्ति भट्टारक महास्वामीजी- मुनि श्री सुधासागरजी महाराज

श्रवणबेलगोला के समाधिस्थ बड़े स्वामी जी चारूकीर्ति भट्टारक जी को सामाजिक और धार्मिक योगदान के लिए जाना जाता है। उन्होंने समाज में नैतिकता, आध्यात्मिकता और...

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चारूकीर्ति स्वामी की 75वीं जन्मजयंती के उपलक्ष्य में विशेष श्रृंखला-2 : चारुकीर्ति जी के व्यक्तित्व का सबसे बड़ा अलंकरण ‘अजातशत्रुता’ -आचार्य श्री सुविधिसागर महाराज

श्रवणबेलगोला के समाधिस्थ बड़े स्वामी जी चारूकीर्ति भट्टारक जी को सामाजिक और धार्मिक योगदान के लिए जाना जाता है। उन्होंने समाज में नैतिकता, आध्यात्मिकता और...

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चारूकीर्ति स्वामी की 75वीं जन्मजयंती के उपलक्ष्य में विशेष श्रृंखला-1 : चारूकीर्ति स्वामी जी ने बहुत पहले से अपनी साधना को शुरू कर रखा था – आचार्य श्री वर्धमानसागर जी महाराज

श्रवणबेलगोला के समाधिस्थ बड़े स्वामी जी चारूकीर्ति भट्टारक जी को सामाजिक और धार्मिक योगदान के लिए जाना जाता है। उन्होंने समाज में नैतिकता, आध्यात्मिकता और...

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चीरहरण का जिम्मेदार कौन ? : महिलाओं के प्रति सोच को बदलने के लिए सार्थक सामूहिक प्रयास करने होंगे        

महिला पर जब भी विपत्ति आती है तो यही होता है, संस्कारों को बेड़ियां कहकर अथवा सशक्तीकरण की दुहाई देकर अथवा अपराधी और उसके साथियों को आचरण व्यवहार को परिभाषित...

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पर्युषण महापर्व एक सितम्बर से प्रारम्भ : आत्मा की शुद्धि के लिए करेंगे तप व जप

जैन धर्म के पर्युषण पर्व मनुष्य को उत्तम गुण अपनाने की प्रेरणा हैं। इन दिनों जैन धर्मावलंबी व्रत, तप, साधना कर आत्मा की शुद्धि का प्रयास करते हैं और स्वयं के...

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जैन धर्म के अनुसार रक्षाबंधन क्यों? : रक्षा बंधन को सच्चे अर्थों में मनाना है तो बाहर और भीतर से एक समान हों

प्रतिवर्ष श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को रक्षाबंधन अत्यंत प्राचीन पर्व है। इसकी परम्परा अठारहवें तीर्थंकर अरहनाथ के तीर्थ से महामुनि विष्णुकुमार के निमित्त से...

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