आज के दौर में बढ़ते पारिवारिक बिखराव को देखते हुए यह विचार आवश्यक हो गया है कि हम अपने घरों को कुरुक्षेत्र बनने से बचाएं। महाभारत और रामचरितमानस दो विपरीत जीवन...
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मनुष्य सभ्यता की सबसे बड़ी उपलब्धि यदि कोई रही है, तो वह केवल नगरों का निर्माण, विज्ञान की प्रगति अथवा आर्थिक संपन्नता नहीं, अपितु परिवार नामक वह आत्मीय संस्था...
आस्था की उन शिलाओं पर आज भी नेमिनाथ प्रभु के चरणों की प्रतिध्वनि सुनाई देती है। धरती पर कुछ स्थान ऐसे होते हैं जिन्हें केवल भूगोल से नहीं समझा जा सकता। वे...
भारत के इतिहास में अनेक सम्राट हुए, जिन्होंने तलवार के बल पर साम्राज्य खड़े किए, सीमाएँ बढ़ाईं और विजय के ध्वज फहराए। किन्तु इतिहास में बहुत कम ऐसे सम्राट हुए...
वर्तमान में गिरनार जी तीर्थ को लेकर जो परिस्थितियाँ बनी हुई हैं, उन्हें देखकर हृदय द्रवित है। हम वह समाज हैं जो अपने धर्म, संस्कृति और प्राचीन तीर्थों पर गर्व...
विश्व धरोहर दिवस, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्मारक एवं स्थल दिवस कहा जाता है। प्रत्येक वर्ष 18 अप्रैल को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मान्यूमेंट...
जैन परंपरा में अक्षय तृतीया का स्थान अत्यंत उच्च, तपप्रधान और शास्त्रीय आधारों से प्रतिष्ठित है। यह पर्व केवल एक ऐतिहासिक घटना का स्मरण नहीं करता, बल्कि त्याग...
आज अधिकांश जनमानस यह नहीं जानता कि भगवान महावीर को “महावीर” क्यों कहा जाता है। सामान्यतः यह धारणा है कि उन्होंने युद्ध लड़े होंगे, असुरों और दुर्जनों का नाश...
खंदार क्षेत्र को साधना से तीर्थ बनाने वाले तपस्वी आचार्य श्री ज्ञानसागर जी ने विश्व हिंदू परिषद की सर्वधर्म यात्रा में दिल्ली दरवाजा पर ऐतिहासिक देशना देकर...
गणिनी प्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने अयोध्या में अपने प्रवचन में कहा कि भगवान ऋषभदेव सिंहासन पर सुख से बैठे हुए थे कि उन्होंने अपना चित्त कला और विद्याओं के...








