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संसारी प्राणी कार्य करने में धर्म को भूल जाता है: आचार्यश्री वर्धमानसागर जी महाराज ने सीकर में धर्म सभा में दी मंगल देशना


हिंसा सबसे बड़ा पाप है। तीर्थंकरों ने भी धर्म का समीचीन ज्ञान प्राप्त कर जीवन का निर्माण कर जीवन से निर्वाण प्राप्त किया है। यह धर्म मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने सीकर में धर्मसभा में दी है। सीकर से पढ़िए, श्रीफल साथी डॉ.राजेश पंचोलिया की यह रिपोर्ट…


सीकर। हिंसा सबसे बड़ा पाप है। तीर्थंकरों ने भी धर्म का समीचीन ज्ञान प्राप्त कर जीवन का निर्माण कर जीवन से निर्वाण प्राप्त किया है। यह धर्म मंगल देशना आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने सीकर में धर्मसभा में दी है। उन्होंने कहा कि एक ही नाम वाले अनेक व्यक्ति होते हैं किंतु एक ही व्यक्ति के अनेक नाम हो ऐसा बिरला महान जीव और व्यक्ति के साथ होता है। भगवान महावीर स्वामी भी महान रहे। उनके भी दीक्षा के पहले पांच नाम थे। आचार्य श्री ने भगवान श्री महावीर के पांच नाम वीर, अतिवीर, सन्मति, वर्धमान और महावीर नाम की विवेचना में बताया कि यह नाम किन कारण से, किनके द्वारा दिए गए। 24 तीर्थंकर और विदेह क्षेत्र के 20 तीर्थंकरों की पूजा की जाती है, जो पुरुषार्थ तप से कर्मों को नाश कर पूज्य होते हैं। पूज्यता को प्राप्त होते हैं, उनकी पूजा भी हम इस भाव से करते हैं कि एक दिन हम भी भगवान की तरह जन्म मरण के दुख से छुटकारा पाकर पूज्य हो जाए।

दर्शन आंखें खोलकर स्तुति बोलकर करना चाहिए

आचार्य श्री ने आगे कहा कि भगवान के दर्शन आंखें खोलकर स्तुति बोलकर करना चाहिए। तभी आपके नेत्रों के द्वारा से भगवान को हृदय में विराजित कर सकते हैं, हम जो भी कार्य करते हैं। देव शास्त्र गुरु के सामने विनय पूर्वक सावधानी से करना चाहिए। संसारी प्राणी कार्य करने में धर्म को भूल जाता है जबकि, हमारा धर्म अहिंसा प्रधान धर्म है। मन वचन काय से किसी को दुख नहीं होना चाहिए। आपके कार्यों से कर्मों का बंध होता हैं। आचार्य श्री ने हिंसा को सबसे बड़ा पाप निरूपित किया है।

जीवन के निर्माण करने का उपदेश दिया जाता है

व्यक्ति बीमार होने पर अस्पताल में इलाज करा कर रोग से मुक्त होता है। इसी प्रकार आपकी आत्मा राग, द्वेष ,मोह रूपी रोग से पीड़ित होकर जन्म और मरण कर रही है। संत समागम रूपी सबसे बड़े चिकित्सालय में धर्म उपदेश से आपको दुख दूर करने का और पूज्य बनने का जीवन के निर्माण करने का उपदेश दिया जाता है। तीर्थंकरों ने समीचीन ज्ञान से जीवन का निर्माण कर निर्वाण पद प्राप्त किया।

बच्चों ने आचार्यश्री का पूजन किया

समाज के पदाधिकारियों के अनुसार आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व दीप प्रज्वलन और चरण पक्षालन करने का सौभाग्य चंदा देवी प्रदीप भरतीया पहाड़िया सीकर को प्राप्त हुआ। रविवार को सन्मति विद्यालय के सैकड़ों बच्चों ने धर्मसभा में उपस्थित होकर आचार्य श्री का पूजन करने का सौभाग्य प्राप्त किया। पूजन आर्यिका श्री महायश मति जी ने कराया।

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