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आर्यिका रत्न 105 संगममति माताजी ससंघ के चातुर्मास 2026 की पत्रिका का हुआ विमोचन


अंबाह के परेड दिगंबर जैन मंदिर में आर्यिका रत्न 105 संगममति माताजी ससंघ के चातुर्मास वर्ष-2026 की पत्रिका का श्रद्धापूर्वक विमोचन किया गया। समाजजनों ने धर्म, तप, संयम और आत्मकल्याण के संदेश को घर-घर पहुंचाने तथा चातुर्मास के सभी आयोजनों में सहभागिता का संकल्प लिया। पढ़िए श्रीफल साथी मनोज जैन नायक की यह रिपोर्ट।


अंबाह (मनोज जैन नायक)। परम पूज्य आर्यिका रत्न 105 संगममति माताजी ससंघ के पावन सान्निध्य में आयोजित होने वाले चातुर्मास वर्ष-2026 की पत्रिका का विमोचन रविवार प्रातः परेड दिगंबर जैन मंदिर में श्रद्धा, भक्ति एवं उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में चातुर्मास समिति, महिला मंडल, युवा वर्ग तथा बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण एवं जिनेंद्र भगवान की वंदना से हुआ। इसके पश्चात उपस्थित अतिथियों ने संयुक्त रूप से चातुर्मास-2026 की पत्रिका का विमोचन किया। पत्रिका में चातुर्मास के दौरान आयोजित होने वाले प्रवचन, पूजन, विधान, स्वाध्याय, धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी प्रकाशित की गई है, जिससे श्रद्धालु समयानुसार सभी आयोजनों में सहभागिता कर सकें।

चातुर्मास आत्मशुद्धि और साधना का महापर्व

चातुर्मास समिति के अध्यक्ष जिनेश जैन ने कहा कि चातुर्मास जैन धर्म की अत्यंत महत्वपूर्ण परंपरा है। वर्षा ऋतु में साधु-साध्वियों का एक स्थान पर विराजमान रहना समाज को नियमित धर्मोपदेश, स्वाध्याय और आत्मचिंतन का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि यह अवधि तप, त्याग, संयम, अहिंसा और सदाचार को जीवन में उतारने का श्रेष्ठ समय है तथा पत्रिका प्रत्येक परिवार तक धर्म संदेश पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बनेगी।

सीए कमलेश जैन ने कहा कि चातुर्मास केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि संस्कारों का महापर्व है। इस अवधि में व्रत, उपवास, सामायिक, स्वाध्याय और दान-पुण्य जैसे धार्मिक कार्यों के माध्यम से आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने समाज के प्रत्येक परिवार से चातुर्मास के सभी आयोजनों में सक्रिय सहभागिता का आग्रह किया।

नई पीढ़ी को धर्म से जोड़ने का माध्यम

विमल जैन ‘राजू’ ने कहा कि चातुर्मास समाज में एकता, सेवा और संस्कारों को सुदृढ़ करने का अवसर है। नई पीढ़ी को धर्म एवं संस्कृति से जोड़ने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। वहीं कुलदीप जैन ने कहा कि चातुर्मास के दौरान श्रद्धालुओं को नियमित प्रवचन, शंका समाधान एवं आध्यात्मिक जीवन मूल्यों को अपनाने का दुर्लभ अवसर प्राप्त होता है।

कार्यक्रम में जिनेश जैन, कमलेश जैन (सीए), विमल जैन ‘राजू’, नरेश जैन ‘गुरु’, अजय जैन (पत्रकार), दिलीप जैन, कुलदीप जैन, लवली जैन, अजय जैन ‘बबलू’, अजय जैन (बुक हाउस), विकास जैन पांडे, मनीष जैन, कपिल जैन, भारत जैन ‘चीकू’, पीयूष जैन पांडे सहित चातुर्मास समिति के सदस्य, महिला मंडल एवं बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

समारोह के अंत में समिति ने विश्वास व्यक्त किया कि आर्यिका रत्न 105 संगममति माताजी ससंघ के सान्निध्य में आयोजित यह चातुर्मास धर्म प्रभावना, आध्यात्मिक जागरण, सामाजिक एकता एवं संस्कार निर्माण की दृष्टि से ऐतिहासिक सिद्ध होगा।

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