गृहस्थ से संत जीवन में प्रवेश कर तीन दीक्षार्थियों ने वीरता और पुण्य की धरा उदयपुर को धन्य कर दिया। आचार्य पुण्यसागर के सान्निध्य में रविवार को विद्या निकेतन स्कूल प्रांगण में सात साल बाद तीन दीक्षार्थियों को सीधे मुनि दीक्षा दी गई। पढ़िए यह विशेष रिपोर्ट…
उदयपुर। गृहस्थ से संत जीवन में प्रवेश कर तीन दीक्षार्थियों ने वीरता और पुण्य की धरा उदयपुर को धन्य कर दिया। आचार्य पुण्यसागर के सान्निध्य में रविवार को विद्या निकेतन स्कूल प्रांगण में सात साल बाद तीन दीक्षार्थियों को सीधे मुनि दीक्षा दी गई। शाही वेशभूषा में मंच पर बैठे दीक्षार्थियों ने जैसे ही गुरु की आज्ञा के बाद देश-विदेश से आए हजारों श्रावक-श्राविकाओं की मौजूदगी में अपने वस्त्र उतारकर दिगंबर वेश धरा तो पंडाल जयकारों से गूंजने लगा। इस क्षण ने पंडाल में वीतराग की नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया।
आशीर्वाद लेने की होड़
सभी धार्मिक क्रियाओं और 28 व्रत दिलाकर आचार्य पुण्य सागर ने नए मुनियों का नामकरण किया। फरीदाबाद के अरङ्क्षवद कोटडिय़ा मुनि 108 उज्ज्वल सागर, मुंबई के आदर्श कुमार जैन मुनि उपदेश सागर और देवीलाल चंपालाल भोरावत का नया नाम मुनि उपशम सागर होगा। यह घोषणा होते ही पंडाल तीर्थंकर, जिनशासन, आचार्य पुण्यसागर और नवदीक्षित मुनियों के जयकारों से गूंज उठा। इसके बाद श्रावक-श्राविकाओं में मुनियों से आशीर्वाद लेने की होड़ मच गई। इससे पहले 2018 में आचार्य सुनील सागर के सान्निध्य में टाउन हॉल में दीक्षार्थियों को मुनि दीक्षा दी गई।
गरिमा से संपन्न हुआ कार्यक्रम
दीक्षा की संपूर्ण विधि संहिता सूरी प्रतिष्ठाचार्य पंडित हंसमुख जैन धरियावद और बाल ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी बिगुल के निर्देशन में हुई। दीक्षा कुंभ स्थापना नरेंद्र एवं बबीता जैन (कोलकाता) ने की। दीक्षार्थियों ने परिवार और समाज से क्षमा याचना की और आचार्य से दीक्षा की स्वीकृति प्राप्त की। प्रचार-प्रसार मंत्री मुकेश पांड्या ने बताया कि संचालन राजेश देवडा ने किया।
आचार्य ने 28 व्रतों का दिया आशीर्वाद
श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर, सेक्टर-4 स्थित नागेंद्र भवन से आचार्य पुण्य सागर ससंघ के सान्निध्य में दीक्षार्थियों की शोभायात्रा निकली। दीक्षार्थियों को सजी हुई बग्गी में बैठाकर रवाना किया। शोभायात्रा जब विद्या निकेतन स्कूल पहुंची तो मंगल ध्वनियों और जयकारों से वातावरण गूंज उठा। अपराह्न 3 बजे दीक्षार्थियों का केशलोंच हुआ। इसके बाद आचार्य ने तीनों दीक्षार्थियों के सिर पर श्री और स्वास्तिक बनाया। दीक्षार्थियों को 28 व्रतों का आशीर्वाद दिया। दीक्षार्थियों को समाजजनों और परिजन ने पिच्छी, कमंडल और शास्त्र भेंट किए।
वीणा दीदी को महिला रत्न सम्मान
समाज की ओर से आचार्य के संघस्थ बाल ब्रह्मचारिणी वीणा दीदी बिगुल को महिला रत्न की उपाधि से अलंकृत किया। इस मौके पर राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षाविद् डॉ. नीलाक्षी जैन का सम्मान हुआ। संघस्थ विकास भैया का भी अभिनंदन किया। स्वामी वात्सल्य के पुण्यार्जक भगवती लाल मुकेश कुमार जङ्क्षसगोत परिवार रहे। इस दौरान आचार्य ने बालक ललितांग का अन्नप्राशन संस्कार भी किया।
ऐसे चला दीक्षा का कार्यक्रम
सुबह 6:30 बजे: आचार्य पुण्य सागर महाराज का पाद प्रक्षालन
8.00 बजे: दीक्षार्थी अवतरण
सुबह 9.00 बजे: प्रवचन और आचार्य की आहार चर्या।
सुबह 11.00 बजे : नागेंद्र भवन से समारोह स्थल तक शोभायात्रा
दोपहर 12.00 बजे : दीक्षा कुंभ स्थापना, दीक्षा प्रार्थना
दोपहर 3.00 बजे : केशलौंच
अपराह्न 4.30 बजे : पिच्छी, कमंडल, शास्त्र भेंट
शाम 5.04 बजे: आचार्य ने नए मुनियों का नामकरण किया।
दिगंबर मुद्रा ही मोक्ष मार्ग है
समारोह में आचार्य पुण्य सागर ने कहा कि दिगंबर मुद्रा ही मोक्ष मार्ग का आधार है। तीर्थंकर ऋषभदेव से लेकर महावीर भगवान तक सभी ने दिगंबर रूप के माध्यम से संसार का परित्याग किया। आचार्य ने बताया कि 38 वर्ष पहले उन्होंने उदयपुर की धरती पर आचार्य शांति सागर की परंपरा में आचार्य अजीत सागर से दीक्षा ली
और वात्सल्य वारिधि आचार्य वर्धमान सागर के आज्ञानुवर्ती बने।
अब आचार्य संघ में कुल 20 मुनि
सेक्टर 11 आदिनाथ दिंगबर जैन मंदिर के अध्यक्ष पारस चित्तौड़ा ने बताया कि अभी मुनि संघ में 17 साधु और आर्यिका हैं, अब संघ 20 का हो जाएगा। दीक्षा कार्यक्रम में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आए। दीक्षा स्थल पर पंडाल के बाहर भी सैकड़ों लोगों ने खड़े रहकर कार्यक्रम देखा। आयोजकों ने अतिथियों के लिए दीक्षा स्थल के आसपास ही ठहरने की व्यवस्था की।
इनसे बढ़ी शोभा
दीक्षा समारोह में विधायक ताराचंद जैन, ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा, निवर्तमान उपमहापौर पारस सिंघवी, दिनेश खोडनिया, भारतवर्षीय दिगंबर जैन महासभा अध्यक्ष गजराज गंगवाल, देवस्थान सहायक आयुक्त जतिन गांधी सहित देशभर के कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। चातुर्मास समिति के अध्यक्ष शांतिलाल वेलावत, झमक लाल अखावत, सुंदरलाल लूणदिया, निर्मल मालवी, गौरव गनोडिया एवं पारस कुणावत ने सभी का आभार व्यक्त किया।













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