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मन और इच्छाओं पर पूर्ण नियंत्रण ही तप : उत्तम तप धर्म पूजन, नव देवता पूजन के साथ भक्ति की 


श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर एवं संत निलय में बुधवार को दशलक्षण महापर्व के सातवें दिन उत्तम तप धर्म मनाया गया। इस पावन अवसर पर श्रीजी की शांतिधारा करने का सौभाग्य देवेंद्र कुमार गोपीलाल पहाड़िया परिवार को प्राप्त हुआ। सनावद से पढ़िए, सन्मति जैन काका की यह खबर…


सनावद। श्री दिगंबर जैन पार्श्वनाथ बड़ा मंदिर एवं संत निलय में बुधवार को दशलक्षण महापर्व के सातवें दिन उत्तम तप धर्म मनाया गया। इस पावन अवसर पर श्रीजी की शांतिधारा करने का सौभाग्य देवेंद्र कुमार गोपीलाल पहाड़िया परिवार को प्राप्त हुआ। सामूहिक पूजन, दशलक्षण पूजन, उत्तम तप धर्म पूजन, नव देवता पूजन उसके बाद शाम को आरती भक्ति की गई। इस दौरान मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज ने उत्तम तप धर्म के बारे में बताते हुए कहा कि इच्छाओं पर पूर्ण नियंत्रण ही तप है। इच्छा निरोधास्तपः अर्थात इच्छाओं का निरोध करना ही तप है अर्थात इंद्रियों के विषय विकारों को हटाकर विजय पाना ही उत्तम तप धर्म है। मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज ने कहा कि मनुष्य को जीवन धैर्य और संयम से ऊपर उठकर तपना, पुरुषार्थ करना ही तप है।

हमें अपने जीवन में योग, तप, ध्यान, संयम, साधना आदि का पुरुषार्थ करना होगा, तभी आत्मा का परमात्मा से मिलना होगा। यही उत्तम तप धर्म का सार है। इस पावन अवसर पर मुनि श्री विश्वसूर्य सागर जी महाराज को आहार दान देने का सौभाग्य पवनकुमार गोधा एवं मुनि श्री साध्य सागर जी महाराज को आहार दान देने का सौभाग्य मूलचंद जी जैन परिवार को प्राप्त हुआ।

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