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जो हम बोलते हैं, वही हमारे संस्कार, सोच और भावनाओं का दर्पण: मुनिश्री सर्वार्थ सागर जी ने धर्मसभा में संयमित संभाषण पर दिया जोर 


पथरिया नगर में आचार्य विशुद्ध सागरजी महाराज ससंघ का चातुर्मास चल रहा है। यहां पर प्रतिदिन प्रातःकाल प्रवचनों के माध्यम से धर्मप्राण समाजजन साधुओं की वाणी से धर्मज्ञान का प्रसाद पा रहे हैं। पथरिया से पढ़िए, अभिषेक अशोक पाटील की यह खबर…


पथरिया। नगर में आचार्य विशुद्ध सागरजी महाराज ससंघ का चातुर्मास चल रहा है। प्रतिदिन प्रातःकाल प्रवचनों के माध्यम से यहां के धर्मप्राण समाजजन साधुओं की वाणी से धर्मज्ञान का प्रसाद पा रहे हैं। यहां आचार्यश्री विशुद्ध सागरजी के शिष्य मुनिश्री सर्वार्थ सागरजी महाराज ने बुधवार को धर्मसभा में कहा कि वाणी हमारे व्यक्तित्व का दर्पण होती है। जो हम बोलते हैं, वही हमारे संस्कार, सोच और भावनाओं को दर्शाता है लेकिन, याद रखिए, शब्द तीर से भी तेज़ होते हैं।

बिना सोचे-समझे बोले गए शब्द कभी-कभी दिलों को ऐसी चोट देते हैं, जो सालों तक नहीं भरती। इसलिए महापुरुषों ने कहा कि सोचो, फिर बोलो। कम बोलो, सार बोलो। उन्होंने कहा कि संयमित वाणी में शक्ति भी होती है और शांति भी। एक मीठा बोल, बिगड़े रिश्ते जोड़ सकता है और एक कटु वचन, अच्छे संबंध तोड़ सकता है।

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Shreephal Jain News

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