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भावलिंगी संत आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने किया केशलौंच : सहारनपुर में आर्यिका माताजी ने भी दीक्षा उपरांत प्रथम केशलौंच किया


सहारनपुर में भावलिंगी संत आचार्य श्री विमर्शसागर जी महाराज ने प्रातः बेला में दिगंबर मुनियों की कठोर चर्या केशलौंच सम्पन्न किया। उनके साथ आर्यिका विमर्शिता माताजी सहित दो माताजियों ने भी दीक्षा के बाद प्रथम बार गुरु के संग केशलौंच किया। इस पावन अवसर पर धर्मसभा आयोजित हुई। पढ़िए सोनल जैन की खास रिपोर्ट…


सहारनपुर में मंगलवार प्रातः बेला का क्षण भक्तों के लिए अविस्मरणीय बन गया जब भावलिंगी संत आचार्य श्री विमर्शसागर जी ने अपने ही हाथों से केश उखाड़कर दिगंबर मुनि की तपस्या का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। उनके साथ आर्यिका श्री 105 विमर्शिता माताजी सहित द्वय माताजियों ने भी अपने गुरु के साथ प्रथम केशलौंच का पुण्य अवसर प्राप्त किया। इस दृश्य ने वहां उपस्थित भक्तजनों की आंखों को भावविभोर कर दिया।

वैराग्य और आत्मगुणों से करते मुनि अपना श्रृंगार 

श्री वीरोदय तीर्यमण्डपम् में यह दिव्य अवसर सुबह 6:30 से 8:15 बजे तक सम्पन्न हुआ। दोपहर में आचार्य भगवन् के पाद प्रक्षालन एवं पूजन का भी आयोजन हुआ। धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने कहा कि केशलौंच तप ही आत्मबल और वैराग्य का परिचायक है। दिगंबर मुनि अहिंसा महाव्रत धारण कर अपने जीवन में किसी भी प्राणी को कष्ट न पहुँचाते हुए बालों को स्वयं उखाड़कर अलग करते हैं ताकि सूक्ष्म जीवों की रक्षा हो सके। उन्होंने कहा कि “मुनि अपने शरीर का श्रृंगार वस्त्राभूषणों से नहीं करते, बल्कि वैराग्य और आत्मगुणों से करते हुए आत्मा को वीतरागमय बना लेते हैं।”

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